
किसी महिला-पुरुष में नियमित व्यायाम और डाइटिंग के बाद भी वजन कम होना उसके बेसल मेटाबॉलिक रेट (बीएमआर) पर निर्भर करता है। जिनका बीएमआर ज्यादा होता है उन्हें कम मेहनत व हल्का-फुल्का डाइट में बदलाव से भी वजन नियंत्रित हो जाता है। लेकिन जिनका बीएमआर कम है उन्हें ज्यादा मेहनत करने की जरूरत पड़ती है।
म हिलाओं की तुलना में पुरुषों की शरीर की बनावट ऐसी है कि पुरुषों का बीएमआर ज्यादा होता है। इसलिए पुरुषों की तुलना में महिलाओं का वजन कम करना ज्यादा मुश्किल होता है।
40 वर्ष की उम्र तक बीएमआर ठीक रहता है लेकिन उम्र बढऩे के साथ इसका स्तर कम होने लगता है। इसलिए बुजुर्गों के लिए भी वजन कम करना मुश्किल होता है।
युवाओं में बीएमआर लेवल अधिक होने से उन्हें वजन कम करना आसान होता है। इसलिए कम उम्र से ही वजन नियंत्रित रखें। इससे बुढ़ापे में आराम रहेगा।
थायरॉइड मेें करनी पड़ती दोगुनी मेहनत
जिन्हें थायरॉइड की समस्या होती है उन्हें भी वजन कम करने में दिक्कत होती है। सामान्य व्यक्ति की तुलना में उन्हें दोगुने से अधिक मेहनत व डाइट का ध्यान रखना पड़ता है। इसकी वजह थायरॉइड में थायरॉक्सिन नामक हार्मोन का स्तर बढऩा है। इससे मरीज का बीएमआर लेवल कम होता है। इसी तरह डिप्रेशन के मरीजों में भी एंटीडिपे्रजेंट दवाइयों के कारण वजन कम करना मुश्किल होता है।