स्वास्थ्य

रीनल डिनरवेशन तकनीक से होगा High blood pressure का इलाज, इस्तेमाल करने वाला पहला हॉस्पिटल बना SMS

अनिता (परिवर्तित नाम), जो 31 साल की उम्र से हाई ब्लड प्रेशर की गंभीर समस्या से जूझ रही थीं, के लिए रीनल डिनरवेशन तकनीक एक वरदान साबित हुई है। सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज की इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी टीम ने इस नवीनतम तकनीक का उपयोग कर अनिता की हाई बीपी की समस्या का बेहद जटिल ऑपरेशन कर सफलता से इलाज किया है।
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Updated: 27 Sep 2024, 12:57 PM IST
High blood pressure will be treated with renal denervation technique : महिला की सर्जरी करते हुए डॉक्टर।
High blood pressure will be treated with renal denervation technique : महिला की सर्जरी करते हुए डॉक्टर।

High blood pressure : 31 साल की उम्र से हाइपरटेंशन (High blood pressure) की गंभीर समस्या से जूझ रही अनिता (परिवर्तित नाम) के लिए नई तकनीक वरदान साबित हुई। सवाईमानसिंह मेडिकल कॉलेज की इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी टीम ने नवीनतम तकनीक रीनल डिनरवेशन से महिला की हाई बीपी (High blood pressure) की समस्या को बेहद जटिल -ऑपरेशन कर ठीक किया है। उत्तर भारत में एसएमएस पहला सरकारी संस्थान है जहां इस तकनीक का इस्तेमाल कर किसी मरीज का इलाज किया गया।

High blood pressure: कार्डियोलॉजी विभाग प्रोफेसर डॉ. एस. एम. शर्मा ने बताया कि यह प्रोसीजर उन मरीजों के लिए है जिनमें गुर्दे की धमनियों में रुकावट नहीं दिखती। एक घंटे तक चले इस प्रोसीजर में गुर्दे की धमनी में एक पतली ट्यूब डाली गई।

Hypertension Treatment : सरकारी संस्थान में पहली बार इस्तेमाल

इस तकनीक में काम आने वाला विशेष कैथेटर करीब 7 लाख रुपए का होता है। इसे बनाने वाली एक निजी फार्मा कंपनी ने निःशुल्क दिया। क्योंकि संस्थान में पहली बार इस्तेमाल किया गया था। इसके अलावा प्रोसीजर की दो लाख की लागत भी निःशुल्क रही। कार्डियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. एस. एम. शर्मा और उनकी टीम डॉ. दिनेश गौतम, डॉ. धनंजय सिंह शेखावत और डॉ. सुनील शर्मा ने यह जटिल केस किया।

सकारात्मक बदलाव

डॉ. दिनेश गौतम और डॉ. धनंजय सिंह शेखावत ने बताया प्रोसीजर के बाद मरीज में काफी कि सकारात्मक बदलाव देखने को मिले।

डॉ. सुनील शर्मा ने बताया कि मरीज का ब्लड प्रेशर 15 से 30 प्रतिशत तक और कम होने की उम्मीद है।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
Updated on:
27 Sep 2024, 12:57 PM IST
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