डॉ. पुलिन गुप्ता, प्रोफेसर मेडिसिन, राम मनोहर लोहिया हॉस्पिटल, नई दिल्ली और चीन के वुहान से 324 भारतीय लोगों को रेस्क्यू कर लाने वाली टीम के लीडर। इनके साथ डॉ. आनंद विशाल, डॉ. संजीत पनेसर और नर्सिंग स्टाफ अजॉय जोस आदि शामिल थे। डॉ. पुलिन की पत्रिका संवाददाता हेमंत पाण्डेय से बातचीत पर आधारित-
30 जनवरी की रात को हमें दिल्ली से वुहान के लिए रवाना होना था। इसके पांच दिन पहले सूचना मिल गई थी कि मुझे इस अभियान का नेतृत्व करना है। इसके बाद से घर का माहौल तनावपूर्ण हो गया। आखिर हमें ही क्यों चुना? लेकिन फिर मेरी मां, पत्नी और दोनों बेटियों ने कहा कि यह गर्व की बात है। बेटियों ने कहा कि पापा आप हैल्थ सोल्जर हैं। देश की सेवा का मौका मिला है। पहले सूचना थी कि 200-250 लोग हैं लेकिन अंतिम दिन पता चला कि 350 से अधिक लोग हो सकते हैं। हमें उनके साथ डॉक्टर, स्टाफ और 36 क्रू मेंबर को भी सुरक्षित रखना था। इसके लिए पर्सनल प्रोटेक्टर्स रखे। इसमें एन90 मास्क और इमरजेंसी मेडिसिन किट थीं ताकि फ्लाइट में किसी की हालत बिगड़ती है तो दिल्ली तक सुरक्षित ला सकें।
31 जनवरी को जब वहां पहुंचे तो पता चला कि चीन सरकार का निर्देश है जब तक भारतीय फ्लाइट वहां पहुंच न जाए किसी को एयरपोर्ट पर नहीं भेजा जाएगा। हमारे पहुंचने के बाद भारतीय दूतावास की मदद से उन लोगों को एयरपोर्ट तक लाने में छह घंटे का समय लगा। एयरपोर्ट पर सबसे पहले उनकी स्क्रीनिंग की गई। टेंप्रेचर मापा गया। उन्हें एन90 मास्क दिए और पहनने का सही तरीका बताया। इस दौरान क्रू मेंबर्स के साथ हमारा अच्छा तालमेल हो गया था। फ्लाइट में ही उन्हें कोरोना वायरस, उससे बचाव, पर्सनल प्रोटेक्टिव डे्रस को कैसे पहनते व उतारते और उपकरणों का इस्तेमाल कैसे करते हैं, बता दिया था। वे भी हमें समझने लगे थे। जैसे-जैसे लोग विमान में आने लगे, उन्हें राहत महसूस होने लगी। वे घर जैसा महसूस करने लगे। वे इतने खुश थे कि इसे शब्दों में बयां नहीं कर सकता क्योंकि वहां काफी समय से घरों में कैद थे। खाना भी ठीक से नहीं मिल रहा था। भारत माता की जय होने लगी।
हमने सभी सीटों पर पहले से ही खाने-पीने की व्यवस्था कर रखी थी। कुल 324 लोग थे। इनमें आधे स्टूडेंट्स और बाकी में मैरिड कपल व बच्चे थे। मिशन के एडमिनिस्ट्रेशन हेड और फ्लाइट कैप्टन अमिताभ सिंह ने यात्रियों से कहा कि कोई परेशानी हो तो हमें तत्काल सूचित करें ताकि डॉक्टर्स आपकी मदद कर सकें। फ्लाइट रात में वहां से चली। हमारी टीम में पांच लोग थे। ऊंचाई पर जाने से ऐसे मरीजों की समस्या बढ़ जाती है। हम चिंतित थे। पूरी रात हममें से कोई सोया नहीं। भगवान का शुक्र है कि किसी को कोई समस्या नहीं हुई। जैसे ही फ्लाइट दिल्ली पहुंची, जय हिंद के नारे लगने लगे। एयरपोर्ट पर ही हमें स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से सूचना मिल गई थी कि आप अब अगले 14 दिन तक अपने घर के एक कमरे में फैमिली मेंबर्स से अलग रहेंगे। किसी से मिलेंगे नहीं। घर में था तो टाइम कट गया लेकिन बच्चों से न मिलने व बात करने की कमी महसूस हुई। इस दौरान घरवाले मेरी सेहत को लेकर चिंतित रहे। परिवार को दिक्कत तो हुई लेकिन देश की ड्यूटी के आगे यह कुछ भी नहीं है। अब हमने फिर से अस्पताल जाना शुरू कर दिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने पूरी टीम की सराहना की। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने पुरस्कृत भी किया है। भारत सरकार ने समय रहते पुख्ता कदम उठाए ताकि कोरोना वायरस देश में घुस न पाए।
कोरोना से बेवजह न डरें, सावधानी बरतने की जरूरत
आ धारहीन बातों पर ध्यान न दें। जब स्वाइन फ्लू आया था तब भी ऐसा ही माहौल बना था। यह स्वाइन फ्लू से कम खतरनाक वायरस है। चीन में इसके भयानक होने के कई कारण हो सकते हैं। वहां का मौसम, प्रदूषण और सी फूड का ज्यादा उपयोग है। अपने देश में यह समय फ्लू के फैलने का होता है। कोरोना से बचाव के लिए फ्लू (मौसमी सर्दी-जुकाम-बुखार) से बचाव वाली सावधानियां का ध्यान रखें। बार-बार हाथ धोते रहें। हाथ मिलाने की जगह नमस्ते ठीक है। खूब पानी पीएं। खुले में बिलकुल न छींके। संक्रमण है तो बाहर न जाएं। 60 वर्ष से अधिक के लोग, कैंसर, बीपी डायबिटीज, एचआइवी रोगी और बच्चों में संक्रमण की आशंका अधिक है।