स्वास्थ्य

जानें कैसे आप कर सकते हैं बल्ड ग्लूकोज को चेक और नियंत्रित

आज के इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे ब्लड ग्लूकोज को चेक करने का तरीका। आप कैसे पता लगा सकते हैं अपने ब्लड शुगर और ग्लूकोज के बारे में।
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Updated: 7 Feb 2022, 6:10 PM IST
विशेषज्ञों के अनुसार इन खाद्य और पेय पदार्थों को करें डाइट में शामिल, जो ब्लड शुगर के लेवल को संतुलित करने में करते है मदद
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ब्लड ग्लूकोज को मॉनिटरिंग करना टाइप 1 एंड टाइप 2 डायबिटीज़ दोनो के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। कनाडा के तीन में से एक व्यक्ति को मधुमेह है। बहुतों को तो पता ही नहीं है। मधुमेह एक ऐसी समस्या है जो डॉक्टरों कहने पर इंसुलिन गतिविधि द्वारा विशेषता है। इंसुलिन शरीर में हार्मोन है जो ग्लूकोज जैसे कार्बोहाइड्रेट के चयापचय के लिए जिम्मेदार है। इसलिए मधुमेह के साथ, ग्लूकोज का स्तर ऊंचा हो जाता है। यह तब व्यक्तियों को अंधापन, गुर्दे की बीमारी और उच्च रक्तचाप, दिल का दौरा और स्ट्रोक जैसी हृदय संबंधी समस्याओं के खतरे में डालता है।

डिबिटिज को या तो टाइप 1 के रूप में बताया जाता है। जो युवा लोगों को प्रभावित करता है और ऐसा लगता है कि इसमें प्रतिरक्षा प्रणाली शामिल है, या टाइप 2, जो वृद्ध व्यक्तियों को प्रभावित कर सकता है। टाइप 2 मधुमेह में, अग्न्याशय इंसुलिन स्रावित करते समय उचित प्रतिक्रिया नहीं देता है। और आनुवंशिकी से लेकर जीवन शैली तक विभिन्न कारक शामिल हो सकते हैं।

परंतु एक बात तो कॉमन होती है टाइप वन और टाइप तो दोनों तरह के डायबिटीज में आपके ब्लड ग्लूकोस लेवल को नियंत्रण में रखना और इसका परीक्षण करते रहना अत्यंत जरूरी है।

एक प्रकार की प्रक्रिया जो डायबिटीज के परीक्षण के लिए लैब रूम में की जाती है। वह है आपके यूरिन का टेस्ट करना इसके लिए आपको यूरीन सैंपल जांच में देने से 2 घंटे पूर्व तक भूखा रहना होता है।


किंतु अब इसे जांच करने के अलग-अलग डिवाइज बाजार में उपलब्ध हैं।

ब्लड ग्लूकोज परीक्षण में सबसे हालिया विकास मॉनिटर हैं जिन्हें "उंगली चुभने" की आवश्यकता नहीं होती है। ये मॉनिटर या तो फ्लैश ग्लूकोज मॉनिटर या निरंतर ग्लूकोज मॉनिटर हैं। दोनों को पहनने के लिए एक सेंसर की आवश्यकता होती है। आमतौर पर कई हफ्तों तक, जो ग्लूकोज के स्तर की निगरानी के लिए कार्य करता है।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
Updated on:
7 Feb 2022, 6:10 PM IST
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