स्वास्थ्य

हाइपोथर्मिया: तापमान घटने-बढऩे का बच्चों पर सबसे अधिक होता है असर

इसका सबसे अधिक खतरा नवजातों को ही होता है क्योंकि उनकी त्वचा मुलायम होती है और सर्दी में शुष्क हवाएंं शरीर की नमी सोख लेती हैं।
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Jan 17, 2020
हाइपोथर्मिया: तापमान घटने-बढऩे का बच्चों पर सबसे अधिक होता है असर
हाइपोथर्मिया: तापमान घटने-बढऩे का बच्चों पर सबसे अधिक होता है असर

इसका सबसे अधिक खतरा नवजातों को ही होता है क्योंकि उनकी त्वचा मुलायम होती है और सर्दी में शुष्क हवाएंं शरीर की नमी सोख लेती हैं। सामान्यत नवजातों के शरीर का तापमान 36.5 डिग्री तक होना चाहिए। ज्यादा ठंड पडऩे से उनके शरीर का तापमान गिरने लगता है। इसको ही हाइपोथर्मिया कहते हैं। इससे बचाने के लिए शिशुओं को बेबी वॉर्मर में 30-32 डिग्री के बीच तापमान पर रखा जाता है।
बचाव में क्या करें
इसके लक्षण दिखे तो तत्काल डॉक्टर को दिखाएं। अगर बच्चे को कम सांस आ रही है तो गंभीर लक्षण हैं। उसे गर्म कमरे में रखें। सर्द हवाओं से बचाएं। कं बल का प्रयोग करें। उसके सिर और शरीर को अच्छे से ढंककर रखेें। गर्दन, सीना और कमर पर गर्म सेंक करें। गुनगुना दूध भी पिला सकते हैं।
इसके लक्षण
लगातार नींद आना या सुस्त रहना, कमजोरी बने रहना, रूखी त्वचा, दिमाग का काम न करना, कंपकपी (शरीर का तापमान ज्यादा कम होने से कांपना बंद हो सकता है।), सांस लेने में तकलीफ या धडकऩों में ज्यादा उतार-चढ़ाव आदि। गंभीर स्थिति में नवजात को कार्डियक अरेस्ट, शॉक और कोमा की स्थिति भी बन सकती है।
इनका रखें ध्यान
नवजात को खुली जगह पर न ले जाएं। सर्दी के दिनों में धूप में ले जाते हैं तो हवा का ध्यान रखें। नहलाने से पहले थोड़ी देर बाथरूम में गीजर का पानी खोल दें। बाथरूम का तापमान सही हो जाएगा

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
Published on:
17 Jan 2020 02:05 pm
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