स्वास्थ्य

IBS: महिलाओं में अधिक, फाइबर डाइट कम लेना भी वजह

इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) आंतों से जुड़ी एक बीमारी है। इसे स्पैस्टिक कोलन, इर्रिटेबल कोलन, म्यूकस कोइलटिस आदि नामों से भी जाना जाता है।

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Apr 05, 2020
IBS:  महिलाओं में अधिक, फाइबर डाइट कम लेना भी वजह
IBS: महिलाओं में अधिक, फाइबर डाइट कम लेना भी वजह

इससे पता चला है कि आंतों में खराबी शुरू हो गई है। इस पर तत्काल ध्यान देना चाहिए। इसमें शारीरिक परेशानी होती है। साथ ही मरीज की पूरी दिनचर्या बिगड़ जाती है। पुरुषों की तुलना में यह बीमारी महिलाओं में अधिक देखने को मिलती है।
कारण: आइबीएस के मुख्य कारणों में चिंता-तनाव के साथ-साथ पेट में संक्रमण भी है। आंतों को नियंत्रित करने के लिए दिमाग से साइटोकाइन नामक हार्मोन निकलता है। तनाव-चिंता से ये हार्मोन कम या ज्यादा बनने लगता है। इससे मरीज के पेट में ऐंठन के साथ दस्त की समस्या शुरू हो जाती है। जिनमें साइटोकाइन कम बनता है उनमें कब्ज और जिसमें अधिक बनता है उनमें दस्त शुरू हो जाता है। कुछ मरीजों में दोनों ही समस्याएं हो सकती हैं इसको मिक्स आइबीएस कहते हैं। ज्यादा बाहर खाना भी कारण हो सकता है।
लक्ष्ण: कब्ज या दस्त, पेट में ऐंठन, दर्द, वजन कम होना, भूख में कमी, तेज या हल्का बुखार आना इसके प्रमुख लक्षणों में से है। कुछ लोगों में मानसिक समस्याएं भी देखने को मिल सकती हैं। वहीं कुछ लोग अनुमान के आधार पर आइबीएस मान लेते हैं। लेकिन आप ऐसा न करें। इसकी पहचान कई आधार पर किया जाता है।
व्यायाम से लाभ
नियमित व्यायाम से पेट और आंतों के मसल्स को भी फायदा मिलता रहता है। पाचन भी ठीक रहता है। योग-व्यायाम के लिए नियमित करीब 45 मिनट का समय दें। इससे तनाव और चिंता की समस्या में भी बचाव होता है। व्यायाम-योग से साइटोकाइन हार्मोन का बैलेंस भी सही रहता है। इससे आंतों की गति भी सामान्य रहती है। नियमित व्यायाम करने से न केवल इम्युनिटी बढ़ती बल्कि अच्छा महसूस करते हैं। डॉ.सुधीर महर्षि, गैस्ट्रोएंटोलॉजिस्ट, एसएमएस मेडिकल कॉलेज, जयपुर

Published on:
05 Apr 2020 06:34 pm