स्वास्थ्य

माइग्रेन के दर्द से परेशान हैं तो इस तरह करें प्राणायम

नियमित प्राणायम करने से माइग्रेन के दर्द में राहत मिलती है। इससे शरीर में सांसों की क्रियाओं पर नियंत्रण करता है। प्राणायाम करते समय फेफड़े से लेकर शरीर के हर अंग में शुद्ध ऑक्सीजन का संचार होता है। इससे मस्तिष्क में अपेक्षाकृत ज्यादा ऑक्सीजन पहुंचती है। इसे नियमित करने सेे माइग्रेन के अटैक या तेज सिरदर्द में मरीज को राहत मिलती है।
2 min read
• •
Updated: 19 Jul 2019, 2:48 PM IST
migrane
माइग्रेन के दर्द से परेशान हैं तो इस तरह करें प्राणायम

सूर्य भेदन : सूर्य भेदन का अर्थ होता है सूर्य को छेदना या आर पार होना। सूर्य भेदन प्राणायाम में श्वांस लेने की प्रक्रिया दाहिनी नासिका और श्वांस छोडऩे की प्रक्रिया बायीं नासिका से करते हैं।
सूर्य अनुलोम-विलोम : सूर्य अनुलोम विलोम प्राणायाम बाह्य नासिका रंद्र को बंद करके केवल दहया नासिका रंद्र से सांस को अंदर लेकर बाहर निकालने की प्रक्रिया को सूर्य अनुलोम-विलोम प्राणायाम कहते हंै।
भ्रामरी : भ्रामरी प्राणायाम करते समय व्यक्ति मधुमक्खी की तरह गुंजन करता है। इसलिए इसे भ्रामरी प्राणायाम कहते हैं। हाथों के अंगूठों से कान बंद करें। तर्जनी उंगली को माथे पर, मध्यमा, अनामिका व कनिष्का उंगली को आंखों के ऊपर रखना है। मुंह बंद रखें। नाक से सामान्य गति से श्वांस लें। नाक से मधुमक्खी जैसी आवाज निकालते हुए सांस निकालें। श्वांस बाहर निकालते समय ऊं का उच्चारण करें। इसे 5-7 बार करें।
सावधानी से घटेगा दर्द

1- अचानक मौसम बदलने, अनिद्रा, तनाव के कारण माइग्रेन हो सकता है। तेल मालिश से आराम मिलेगा।
2- छींक, खांसी व शोक के कारण माइग्रेन बढ़ता है। इससे बचें।
3- अत्यधिक समय कंप्यूटर मोबाइल देखने से माइग्रेन बढ़ता है इसलिए जरूरी होने पर ही प्रयोग करें।
4- अधिक नमक, चटपटी चीजें, चाय- कॉफी, शराब व तम्बाकू के प्रयोग से माइग्रेन बढ़ता है। प्रयोग न करें।
5- फास्टफूड, जंकफूड आर्टिफिशियल स्वीटनर युक्त चीजें न खाएं।
6- फलों में संतरा, मौसमी, पपीता खट्टा आम खाना वर्जित है। फ्रिज में रखा पानी, कोल्ड ड्रिंक्स न पीएं।
7- सरसों व अलसी का तेल का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
8- ध्वनि प्रदूषण से माइग्रेन बढ़ता है। हफ्ते में एक दिन कानों में तेल डालें।
ये चीजें देती हैं राहत
1- रात में 4-5 बादाम भिगोकर सुबह चबाकर खाएं। गुड़ में बना बादाम पाक भी फायदेमंद है।
2- दूध को हल्दी, इलायची व केसर डालकर आधे घंटे उबालकर पीएं।
3- सुपाच्य व रेशेदार सब्जियों का अधिक सेवन करें। प्रतिदिन गरम व ताजा भोजन करें।
4- फलों में सेब, अनार, खजूर व काजू, बादाम, अखरोट, किशमिश और मुनक्का सुबह-शाम खाएं।
5- तिल, मूंगफली व सूरजमुखी तेल से बनी चीजें खाएं। मिश्री के साथ एक चम्मच मक्खन प्रात: खाली पेट खाने से आराम मिलता है।
एक्सपर्ट : डॉ. काशीनाथ समगंडी,आयुर्वेद व योग विशेषज्ञ, राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, जयपुर

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
Published on:
Also Read
View All
पुलिस की दोहरी कार्रवाई: 27 किलो डोडा चूरा के साथ गिरफ्तार आरोपी के घर चल रही थी नकली घी की फैक्ट्री

Cancer Pain: कैंसर के दर्द को सहना जरूरी नहीं, क्लीवलैंड क्लिनिक से जानिए दर्द से राहत देने वाले उपचार और प्रभावी तरीके

Age Regression: डर, तनाव या पुराने सदमे से जुड़ा हो सकता है बचपन जैसा व्यवहार, क्लीवलैंड क्लिनिक से जानिए एज रिग्रेशन के संकेत

Shamonda Virus Explained: फ्रांस में पहली बार इंसान में कैसे पहुंचा शामोन्डा वायरस, WHO और ECDC से जानें फैलने का तरीका

World Polio Day 2026: क्या आपके बच्चे का पोलियो टीकाकरण पूरा है? सीडीसी से जानें कैसे काम करती है ये वैक्सीन, OPV और fIPV का सही चार्ट