
इन दिनों सोशल मीडिया पर एक जानकारी तेजी से वायरल हो रही है। इसमें कहा जा रहा है कि टॉन्सिल और अपेंडिक्स निकालने के बाद बच्चों की इम्युनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) पर असर पड़ता है। इम्युनिटी घट सकती है। इससे कई बीमारियों की आशंका बढ़ती है। जानते हैं एक्सपर्ट की राय-
यह है सच्चाई
यह बात सही है। ये दोनों शरीर के खास अंग हैं जो इम्युन सिस्टम से जुड़े होते हैं। कम उम्र में अपेंडिक्स या टॉन्सिल निकलवाना पड़ता है तो इसका असर मरीज की इम्युनिटी पर असर पड़ सकता है।
टॉन्सिल के काम
यह गले और तालू के बीच होता है जो मुंह-नाक के रास्ते शरीर के अंदर जाने वाले जीवाणुओं, किटाणुओं को रोकता है। इससे अधिक मात्रा में तरल पदार्थ (सफेद रक्त कणिकाएं) निकलता है जो किटाणुओं को मारकर बीमारियों से बचाता है।
टॉन्सिल निकालने
के बाद
टॉन्सिल निकालने के बाद सर्दी, जुकाम, गले में संक्रमण और सांस से जुड़ी बीमारियों की आशंका बढ़ जाती है। कई बार सर्जरी के बाद भी संक्रमण का खतरा रहता है।
अपेंडिक्स के काम
वैसे अपेंडिक्स को बेकार अंग मानते हैं। लेकिन कई बार इसका उपयोग भी होता है। छोटे बच्चों में इम्युनिटी बढ़ाने के साथ मूत्र नली में संक्रमण के बाद सपोर्ट पाइप की तरह काम में आ जाता है। इसमें बार-बार संक्रमण होने पर ही निकालवाना चाहिए।
ऑपरेशन को टालें नहीं...
जांच के बाद अपेंडिक्स की पुष्टि हो चुकी और डॉक्टर सर्जरी के लिए सलाह दे चुका है तो इसे टालें नहीं। अपेंडिक्स में भोजन फंसकर सडऩे लगता है। अपेंडिक्स फटने का डर रहता है। यह खतरनाक हो सकता है।
इसलिए निकालना जरूरी
टॉन्सिल को बिना कारण नहीं निकलवाना चाहिए। कई ऐसी स्थिति बनती है जिसमें इसको निकालना पड़ता है। इसकी सर्जरी को टॉन्सिलेक्टमी कहते हैं। अगर टॉन्सिल में बार-बार संक्रमण हो रहा है। संक्रमण से टॉन्सिल के पीछे वाले हिस्से में पस जमा हो रहा, ब्लीडिंग हो रही या फिर आकार बढ़ रहा है तो इसकी सर्जरी की जरूरत पड़ती है।