स्वास्थ्य

SPECIAL REPORT : भारत में संक्रमितों को अमरीका से आठ गुना कम वेंटिलेटर, आइसीयू और ऑक्सीजन की जरूरत

लॉकडाउन में ढील देने और प्रवासियों को घर पहुंचाने की वजह से कोरोना वायरस का संक्रमण तेजी से बढ़ गया। विश्लेषण करने पर पता चलता है कि सबसे संक्रमित राज्यों महाराष्ट्र, दिल्ली, गुजरात और तमिलनाडु में संक्रमितों की अपेक्षा आइसीयू या वेंटिलेटर की जरूरत पांच फीसदी से भी कम है। इसके विपरीत अमरीका में 40.7 प्रतिशत और चीन में 30 प्रतिशत मरीजों को आइसीयू में भर्ती करने की जरूरत पड़ रही है।

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May 30, 2020

नई दिल्ली. 27 मई को देश में कुल 83,004 सक्रिय मामलों में से 3500 से कम मरीजों को ऑक्सीजन थैरेपी, आइसीयू या वेंटिलेटर की जरूरत थी। कुल संक्रमितों में से 1868 मरीजों को आइसीयू (2.25 प्रतिशत) की जरूरत थी। इसमें से सिर्फ तीन वेंटिलेटर पर थे। 1585 मरीज (1.91 प्रतिशत) ऑक्सीजन पर थे। यह मांग शुरू से अब तक यही है। 15 मई तक देश में 18855 वेंटिलेटर उपलब्ध थे। इसके अलावा सरकार ने 60 हजार और वेंटिलेटर का आदेश दिया है।

तीन राज्यों में एक भी मरीज वेंटिलेटर पर नहीं
छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार में जहां प्रवासियों के पहुंचने के बाद संक्रमितों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन राहत की खबर यह है कि अब तक वहां एक भी मरीज वेंटिलेटर, ऑक्सीजन या आइसीयू में नहीं है। हालांकि विशेषज्ञ इसे महामारी का प्रारंभिक चरण बता रहे हैं। 27 मई तक उत्तर प्रदेश में 2,680 सक्रिय मामलों में से 61 को आइसीयू और 38 को ऑक्सीजन की जरूरत थी। किसी मरीज को वेंटिलेटर पर रखने की जरूरत नहीं पड़ी।
देश में 1.91 प्रतिशत को ऑक्सीजन की जरूरत
देश में सबसे ज्यादा मौतें महाराष्ट्र में हुई हैं। 27 मई को, जब महाराष्ट्र में सक्रिय मामलों की संख्या 36012 थी, तो ऑक्सीजन पर सिर्फ 796 (2.21 प्रतिशत) लोग थे, जबकि दिल्ली में 6954 सक्रिय मामलों में से 248 (3.56 प्रतिशत) ऑक्सीजन पर थे। देश में 1.91 प्रतिशत मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही है जो कुछ दिनों बाद ही स्वस्थ हो जाते हैं। यदि ऑक्सीजन नहीं दी जाती है तो आंतरिक अंगों के नुकसान की आशंका बढ़ती है।

पश्चिम बंगाल, मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा
पश्चिम बंगाल में करीब 10.34 प्रतिशत को आइसीयू और 5.8 प्रतिशत को ऑक्सीजन की जरूरत है। अब तक 295 मौतें हो चुकी हैं। मध्यप्रदेश में 7.85 प्रतिशत मरीज ऑक्सीजन पर और 6.44 प्रतिशत आईसीयू में थे। अब तक 321 मौतें हो चुकी हैं। पश्चिम बंगाल व मध्यप्रदेश को छोड़कर देखें तो ऑक्सीजन थैरेपी की अपेक्षा वेंटिलेटर का प्रयोग की जरूरत काफी कम पड़ी। पब्लिक हैल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष व आइसीएमआर के सदस्य डॉ. के. श्रीनाथ रेड्डी का कहना है कि क्रिटिकल केयर के उपकरणों सीमित मांग का अर्थ है कि मरीजों की हालत अपेक्षाकृत गंभीर कम हो रही है।

कोरोना से लडऩे के लिए तैयारी
देश में 69 प्रतिशत संक्रमितों में हल्के लक्षण और 15 प्रतिशत से कम मरीजों को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत पड़ती है। हल्के लक्षण वाले मरीजों को ज्यादातर क्वॉरंटीन सेंटरों में रखा जा रहा है। हालात बिगडऩे पर उन्हें अस्पतालों में स्थानांतरित किया जाता है। देश में 27 मई तक 930 कोरोना स्पेशल हॉस्पिटल में 158747 आइसोलेशन बेड, 20355 आइसीयू बेड, 69076 ऑक्सीजन सुविधा युक्त बेड थे। इसके अलावा 2362 स्वास्थ्य सेंटरों में 132493 आइसोलेशन बेड, 10341 क्वॉरंटीन सेंटर और 7195 कोविड केयर सेंटरों में 652830 बेड की व्यवस्था की गई है। अब तक 33.62 लाख टेस्ट किए जा चुके हैं।

Published on:
30 May 2020 12:17 am
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