स्वास्थ्य

जीवनदाता बनें! रक्त कैंसर के खिलाफ लड़ाई में स्टेम सेल दाताओं की भारी कमी

देश में रक्त कैंसर (Blood cancer) से हर साल 70,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो जाती है. इस गंभीर बीमारी से लड़ने के लिए भारत में स्टेम सेल दाताओं (Stem cell donors) की भारी कमी है.
2 min read
• •
Updated: 28 May 2024, 12:48 PM IST
Blood Stem Cell Donation
Blood Stem Cell Donation

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में रक्त कैंसर से लड़ने के लिए स्टेम सेल दाताओं (Stem Cell Donor) की तत्काल आवश्यकता है। हर साल रक्त कैंसर से 70,000 से अधिक लोगों की मौत हो जाती है। World blood cancer day (28 मई) से पहले विशेषज्ञों ने यह चेतावनी दी है।

विश्व रक्त कैंसर दिवस (World blood cancer day) हर साल रक्त कैंसर और थैलेसीमिया जैसी अन्य खतरनाक रक्त विकारों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है। इन बीमारियों से भारत में लाखों लोग प्रभावित हैं।

हालांकि कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी जैसे पारंपरिक तरीके मौजूद हैं, रक्त कैंसर के कई रोगियों के लिए एकमात्र उम्मीद स्टेम सेल प्रत्यारोपण (Stem cell therapy) ही है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि भारत में हर 5 मिनट में किसी न किसी व्यक्ति को रक्त कैंसर का पता चलता है। इसके बावजूद, देश में स्टेम सेल दाताओं (Stem Cell Donor) की भारी कमी है।

भारत दुनिया की थैलेसीमिया राजधानी

गुरुग्राम के फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट के प्रमुख निदेशक और मुख्य BMT डॉ राहुल भार्गव ने बताया, भारत दुनिया की थैलेसीमिया राजधानी होने के साथ-साथ रक्त कैंसर के मामले भी बहुत ज्यादा हैं। स्टेम सेल प्रत्यारोपण (Stem cell therapy) ही इन बीमारियों का इलाज है, लेकिन भारत जैसे आनुवंशिक रूप से विविध देश में एक अनुकूल स्टेम सेल दाता (Stem Cell Donor) ढूंढना मुश्किल है।

भारत में केवल लगभग 6 लाख लोग ही दाता के रूप में रजिस्टर्ड

एक गैर-लाभकारी संस्था DKMS BMST फाउंडेशन इंडिया के सीईओ पैट्रिक पॉल ने कहा, भारत में हर पांच मिनट में किसी न किसी व्यक्ति को रक्त कैंसर या किसी गंभीर रक्त विकार का पता चलता है। दुनिया भर में 4.1 करोड़ से अधिक दाता होने के बावजूद, भारत में केवल लगभग 6 लाख लोग ही दाता के रूप में रजिस्टर्ड हैं। हजारों रोगियों को जीवन रक्षक प्रत्यारोपण के लिए मिलने वाले स्टेम सेल दाताओं (Stem Cell Donor) की सख्त जरूरत है। हमें इन रोगियों को लड़ने का मौका देने के लिए अपने दाता डेटाबेस का काफी विस्तार करने की आवश्यकता है।

विशेषज्ञों ने स्टेम सेल दान (Stem Cell Donor) की प्रक्रिया के बारे में जागरूकता की कमी और गलतफहमी पर भी चिंता जताई, जिसके कारण लोग दाता के रूप में रजिस्टर करने में हिचकिचाते हैं।

डॉ राहुल ने कहा, स्टेम सेल दाता रजिस्ट्री में जागरूकता बढ़ाना और भागीदारी इस जीवन रक्षक जरूरत को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण है। आसान शब्दों में कहें तो, स्टेम सेल थेरेपी (Stem cell therapy) क्षतिग्रस्त ऊतकों या अंगों को ठीक करने या उन्हें पूरी तरह से बदलने के लिए स्टेम सेल का उपयोग करती है। इसका उपयोग कुछ प्रकार के रक्त कैंसर, जैसे ल्यूकेमिया और लिम्फोमा के इलाज के लिए किया जाता है।

विशेषज्ञों ने बताया कि स्टेम सेल प्रत्यारोपण के लिए मिलान सिर्फ ब्लड ग्रुप के आधार पर नहीं, बल्कि ह्यूमन ल्यूकोसाइट एंटीजन (HLA) विशेषताओं के आधार पर होता है। संभावित स्टेम सेल दाता बनने के लिए 18 से 55 वर्ष के बीच का स्वस्थ वयस्क होना आवश्यक है।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
Updated on:
28 May 2024, 12:48 PM IST
Published on:
Also Read
View All
Healthy Sargi Recipes for Karwa Chauth: दिनभर एनर्जेटिक रहने के लिए सरगी में क्या खाएं, हेल्थलाइन और वैरीवेल हेल्थ से जानें पनीर और फ्रूट्स के फायदे

World Stroke Day 2026: अचानक बोलने में लड़खड़ाहट या शरीर के एक तरफ कमजोरी, मेयो क्लिनिक से जानें स्ट्रोक में हर मिनट क्यों है जरूरी?

Karwa Chauth Fast During Periods: पीरियड्स के दौरान करवा चौथ का व्रत रखना चाहिए या नहीं, जानें क्या कहती है Doctors की सलाह

Safe Diet After Nirjala Vrat: व्रत खोलने का सही तरीका क्या है? डॉक्टर से जानें किन बातों का ध्यान रखना जरूरी

Karwa Chauth 2026: सरगी से लेकर बच्चे की देखभाल तक, ऑस्ट्रेलियन ब्रेस्टफीडिंग एसोसिएशन से जानें छोटे बच्चों वाली महिलाएं कैसे रखें व्रत