
Stuttering Awareness Day: हर साल अक्टूबर का महीना उन सभी लोगों के लिए बहुत खास होता है जो बोलते समय हकलाने या अटकने की समस्या का सामना करते हैं। International Stuttering Awareness Day Online Conference (अंतर्राष्ट्रीय हकलाना जागरूकता दिवस ऑनलाइन कांफ्रेंस) के अनुसार, दुनिया भर में इसको लेकर फैली गलतफहमियों को दूर करने और लोगों को जागरूक करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय हकलाना जागरूकता दिवस मनाया जाता है। इस बार की थीम यह समझाने पर जोर देती है कि हकलाने का अनुभव हर इंसान के लिए एक जैसा नहीं होता। किसी के लिए यह बहुत मामूली बात हो सकती है, तो किसी के लिए दूसरों के सामने अपनी बात रखना बहुत बड़ा चैलेंज बन जाता है। आइए जानते हैं कि इसके पीछे के कारण क्या है और इसको कैसे कम किया जा सकता है।
द स्टटरिंग फाउंडेशन के अनुसार, अक्सर लोग सोचते हैं कि हकलाना सिर्फ एक शारीरिक समस्या या बोलने में होने वाली हिचकिचाहट है। लेकिन सच यह है कि इसका असर इंसान के मन और उसके आत्मविश्वास पर बहुत गहरा पड़ता है। जब कोई व्यक्ति बोलते समय अटकता है, तो उसे समाज के ताने या मजाक का डर सताने लगता है।
हकलाना किसी की लापरवाही या जानबूझकर की गई गलती नहीं होती। इसकी शुरुआत बचपन से ही हो सकती है और इसके पीछे कई वजहें काम करती हैं:
हकलाने की वजह से अपनी आवाज को दबाने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। थोड़ी सी समझ और सही आदतों से आप अपनी बात बहुत आसानी से रख सकते हैं:
हकलाना किसी इंसान की काबिलियत या समझदारी को कम नहीं करता। समाज में जरूरत इस बात की है कि हम किसी के अटकने पर उसका मजाक उड़ाने के बजाय उसे सब्र से सुनें। जब हम एक-दूसरे की कमियों को स्वीकार करके उन्हें बोलने का पूरा मौका देंगे, तभी हर इंसान बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी बात रख पाएगा।