
कैंसर नहीं है फिर भी हर वक्त बीमारी का डर क्यों लगता है- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)
Carcinophobia Symptoms: शरीर में हल्का सा दर्द, त्वचा पर कोई छोटा सा निशान या शरीर के किसी हिस्से में मामूली सूजन आते ही क्या आपके मन में भी सबसे पहला ख्याल कैंसर का आता है? अगर डॉक्टर की तमाम जांचों और रिपोर्ट्स में सब कुछ नॉर्मल आने के बाद भी आपके दिमाग से कैंसर का डर नहीं निकलता, तो आप अकेले नहीं हैं। दुनिया भर में लाखों लोग इस गंभीर मानसिक और भावनात्मक दौर से गुजर रहे हैं। कैंसर होने के इस डर को कार्सिनोफोबिया (Carcinophobia) कहा जाता है। कार्सिनोफोबिया एक ऐसा मानसिक डर है जो किसी इंसान की मानसिक शांति, नींद और सामान्य जीवन को पूरी तरह से तहस-नहस कर सकता है। आइए, समझते हैं कि कार्सिनोफोबिया क्या होता है, यह क्यों होता है और इससे कैसे बाहर निकला जा सकता है।
जर्नल 'नेचर' (Nature) में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार, कार्सिनोफोबिया का मतलब है 'कैंसर होने का अत्यधिक और अस्वाभाविक डर'। इसमें व्यक्ति को हर वक्त यही चिंता सताती रहती है कि उसे कैंसर है या भविष्य में कभी न कभी जरूर हो जाएगा। यह डर सिर्फ उन्हीं लोगों को नहीं सताता जिन्हें कभी कोई बीमारी नहीं हुई, बल्कि उन लोगों में भी बहुत ज्यादा देखा जाता है जो पहले कैंसर से जंग जीत चुके हैं। कैंसर से ठीक हो चुके मरीजों में बीमारी के दोबारा वापस लौटने के डर को 'फियर ऑफ कैंसर रिकरेंस' (Fear of Cancer Recurrence) कहा जाता है। मेयो क्लिनिक के मुताबिक, कैंसर से पूरी तरह ठीक हो चुके लगभग हर मरीज के मन में कभी न कभी यह डर जरूर सिर उठाता है।
मेयो क्लिनिक के अनुसार, किसी इंसान के मन में कैंसर का यह डर बैठने के पीछे कई मुख्य कारण हो सकते हैं;
जब यह डर मन पर हावी होता है, तो व्यक्ति में ये लक्षण देखने को मिलते हैं;
मेयो क्लिनिक के विशेषज्ञों का मानना है कि इस डर को दबाने के बजाय इसे सही तरीके से संभालना जरूरी है;
Updated on:
08 Oct 2026 02:56 pm
Published on:
08 Oct 2026 02:56 pm
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