
Keloid Scar Symptoms: कभी त्वचा पर कोई मामूली खरोंच आती है, कान-नाक छिदवाते (Piercing) हैं या कोई छोटा-सा कट लगता है, तो कुछ समय बाद वहां की त्वचा ठीक होने लगती है। लेकिन कई बार घाव भरने के बाद भी त्वचा का वह हिस्सा सामान्य नहीं होता, बल्कि वहां एक उभरा हुआ, मोटा और कड़ा निशान बनने लगता है। अगर आपके साथ भी ऐसा हुआ है, तो यह साधारण दाग नहीं बल्कि केलोइड स्कार (Keloid Scar) हो सकता है। मेयो क्लिनिक के अनुसार, केलोइड त्वचा की एक ऐसी स्थिति है जिसमें घाव भरने की प्रक्रिया जरूरत से ज्यादा बढ़ जाती है। यह निशान मूल चोट या घाव के आकार से भी काफी बड़ा हो सकता है और देखने में थोड़ा अजीब लग सकता है। हालांकि, केलोइड से सेहत को कोई बड़ा खतरा नहीं होता, लेकिन कई बार इसमें खुजली, खिंचाव या दर्द की परेशानी हो सकती है। आइए समझते हैं कि केलोइड स्कार क्या होता है, यह क्यों बनता है और इसके लक्षण क्या हैं।
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, जब भी हमारी त्वचा पर कोई कट, खरोंच या घाव लगता है, तो शरीर उसे ठीक करने के लिए कोलेजन (Collagen) नाम का एक प्रोटीन बनाता है। कोलेजन घाव को भरने और नई त्वचा बनाने में मदद करता है। साधारण मामलों में घाव भर जाने के बाद शरीर कोलेजन बनाना बंद कर देता है। लेकिन जिन लोगों को केलोइड बनने की प्रवृत्ति होती है, उनका शरीर घाव ठीक होने के बाद भी लगातार कोलेजन बनाता रहता है। नतीजा यह होता है कि घाव की जगह पर जरूरत से ज्यादा मास (Tissue) इकट्ठा हो जाता है और वह हिस्सा ऊपर की तरफ उभरकर एक मोटा, कड़ा निशान बन जाता है।
एनएचएस के मुताबिक, त्वचा पर किसी भी तरह की चोट के कारण केलोइड बन सकता है। सबसे आम कारण ये हैं;
केलोइड को पूरी तरह से रोकना थोड़ा मुश्किल होता है, लेकिन अगर आपकी स्किन पर केलोइड आसानी से बनते हैं तो आप कुछ बातों का ध्यान रख सकते हैं, अगर आपको पता है कि आपकी त्वचा पर केलोइड बनते हैं, तो कान छिदवाने या टैटू बनवाने से परहेज करें। त्वचा पर खरोंच या कट लगने पर उसे तुरंत साफ रखें और डॉक्टर की सलाह से उस पर दबाव देने वाली पट्टी या सिलिकॉन जेल शीट का इस्तेमाल करें।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।