
Kidney Stone Symptoms: अगर कमर के एक तरफ अचानक तेज दर्द उठे, बार-बार पेशाब जाने की इच्छा हो या पेशाब करते समय जलन महसूस हो, तो लोग अक्सर इसे गैस, मांसपेशियों का दर्द या सामान्य यूरिन इंफेक्शन समझ लेते हैं। लेकिन कुछ मामलों में ये लक्षण किडनी स्टोन (Kidney Stone) की ओर भी इशारा कर सकते हैं।
National Institute of Diabetes and Digestive and Kidney Diseases (NIDDK) के अनुसार, किडनी स्टोन तब बनते हैं जब पेशाब में मौजूद कुछ खनिज और लवण (Minerals and Salts) मिलकर कठोर कणों का रूप ले लेते हैं। छोटे स्टोन बिना परेशानी के निकल सकते हैं, लेकिन बड़े स्टोन तेज दर्द और दूसरी जटिलताओं का कारण बन सकते हैं।
NIDDK के अनुसार, किडनी स्टोन का सबसे आम लक्षण कमर के एक तरफ या पसलियों के नीचे अचानक शुरू होने वाला तेज दर्द है। यह दर्द पेट के निचले हिस्से या जांघ तक भी फैल सकता है।
अगर पेशाब करते समय जलन या दर्द महसूस हो रहा है, तो यह सिर्फ संक्रमण नहीं, बल्कि स्टोन के मूत्र मार्ग में आने का संकेत भी हो सकता है।
स्टोन जब मूत्र नली के करीब पहुंचता है, तो बार-बार पेशाब जाने की जरूरत महसूस हो सकती है, भले ही हर बार पेशाब कम आए।
गुलाबी, लाल या भूरे रंग का पेशाब इस बात का संकेत हो सकता है कि स्टोन ने मूत्र मार्ग में हल्की चोट पहुंचाई है। ऐसे लक्षण को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
तेज दर्द के साथ कई लोगों को मतली या उल्टी भी हो सकती है। यह शरीर की दर्द के प्रति प्रतिक्रिया हो सकती है।
अगर पेशाब का रंग धुंधला हो या उसमें तेज बदबू आए, तो यह संक्रमण या स्टोन से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है।
अगर किडनी स्टोन के साथ संक्रमण भी हो जाए, तो बुखार और ठंड लगना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। यह स्थिति मेडिकल इमरजेंसी हो सकती है और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
NIDDK के अनुसार, कुछ आसान आदतें अपनाकर किडनी स्टोन का खतरा कम किया जा सकता है। पूरे दिन पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, ताकि पेशाब हल्के रंग का रहे। खाने में नमक की मात्रा कम रखें। डॉक्टर की सलाह के अनुसार पर्याप्त कैल्शियम लें, कैल्शियम को बिना सलाह के पूरी तरह बंद न करें पशु प्रोटीन (जैसे लाल मांस) का अत्यधिक सेवन करने से बचें। अगर पहले किडनी स्टोन हो चुका है, तो डॉक्टर से स्टोन के प्रकार के अनुसार डाइट प्लान बनवाएं।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।