शरीर में फैट या वसा की मात्रा जब बढ़ने लगती है तब फैट शरीर के दूसरे अंगों में जमा होने लगता है। लिवर में फैट के जमा होने की वजह से कामकाज प्रभावित होने लगता है। लिवर में फैट की मात्रा पांच से दस फीसदी हो जाती है तो कोशिकाओं की सेहत खराब होती है जिससे शरीर में कई तरह के रोग उत्पन्न होते हैं। लिवर फेल हो गया तो लिवर ट्रांसप्लांट ही एकमात्र इलाज है जिससे रोगी को नया जीवन मिल सकता है।

लिवर ऐसे पदार्थो का निर्माण करता है जिससे शरीर में एल्बुमिन, प्रोटीन और खून का थक्का बनाने वाले तत्वों का निर्माण करता है। लिवर के बिना शरीर में रक्त का संचार संभव नहीं है और मेडिकल की दुनिया में इसे शरीर का पॉवर हाउस कहते हैं। लिवर में एक से दो प्रतिशत ही फैट होता है।
फैटी लिवर में ऐसे दिखते हैं लक्षण
लिवर में फैट बढऩे से लिवर बढ़ जाता है। इस वजह से एंजाइम्स की मात्रा बढऩे के साथ लिवर फंक्शन भी खराब हो जाता है। फैटी लिवर के प्रमुख लक्षण नहीं है हालांकि जब 30 से 40 फीसदी फैट लिवर में जमा हो जाता है तो भूख न लगना, जी-घबराना, वजन कम होने लगना, पेट के उपरी भाग में दर्द की तकलीफ बनी रहती है। गंभीर मामलो में व्यक्ति को पीलिया होने के साथ लिवर में सिकुडऩ आने के साथ लिवर सिरोसिस का खतरा बढ़ जाता है। अत्यधिक फैट जमा होने से पेट में पानी भरने के साथ शरीर में सूजन आने लगती है जिससे मानसिक स्थिति भी खराब हो जाती है।