
Cracking Knuckles Side Effects: उंगलियां चटकाने की आदत बहुत से लोगों में होती है। कुछ लोग ऐसा आदतन करते हैं, तो कुछ को उंगलियां चटकाने के बाद हाथों में हल्कापन महसूस होता है। लेकिन ऐसा करते देख कुछ लोग टोकते हुए कहते हैं कि आगे चलकर गठिया हो जाएगा या हाथों की पकड़ कमजोर हो जाएगी। जानते हैं इस बात में कितनी सच्चाई है?
उंगलियों के जोड़ों के अंदर एक चिकना तरल पदार्थ होता है, जिसे सिनोवियल फ्लूइड कहा जाता है। यह तरल जोड़ों को आसानी से हिलने में मदद करता है। हार्वर्ड हेल्थ पब्लिशिंग (Harvard Health Publishing) के अनुसार जब उंगली को खींचते हैं या पीछे की ओर मोड़ते हैं तो जोड़ के अंदर दबाव बदलता है। इससे सिनोवियल फ्लूइड में मौजूद गैस के बुलबुले फूटते हैं और चटकने की आवाज आती है। मेयो क्लिनिक (Mayo Clinic) भी यही बताता है कि जोड़ के अंदर के तरल पदार्थ में बने बुलबुलों के फूटने से चटकने की आवाज सुनाई देती है।
हार्वर्ड हेल्थ पब्लिशिंग (Harvard Health Publishing) के अनुसार, जो लोग नियमित रूप से अपनी उंगलियां चटकाते हैं और जो ऐसा नहीं करते, उनके हाथों में गठिया होने की दर में कोई खास अंतर नहीं पाया गया। यानी उंगलियां चटकाने को हाथों में गठिया होने का कारण नहीं माना गया है।
क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार भी 2011 के एक अध्ययन में यह देखा गया था कि कोई व्यक्ति कितने सालों से और कितनी बार उंगलियां चटका रहा है। इस अध्ययन में भी उंगलियां चटकाने की अवधि या मात्रा का जोड़ों में सूजन या ऑस्टियोआर्थराइटिस के खतरे से कोई संबंध नहीं मिला। इसलिए सिर्फ उंगलियां चटकाने की आदत के कारण यह मान लेना कि आगे चल के गठिया हो जाएगा, सही नहीं है।
ऊपर जिस अध्ययन की चर्चा है, उसी के निष्कर्ष के आधार पर क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) बताता है कि ऐसा नहीं पाया गया कि ज्यादा समय तक या ज्यादा बार उंगलियां चटकाने से ऑस्टियोआर्थराइटिस या जोड़ों में सूजन का खतरा बढ़ता है।
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार उंगलियां चटकाते समय बहुत ज्यादा जोर नहीं लगाना चाहिए और उंगली को गलत दिशा में नहीं मोड़ना चाहिए। अगर चटकाने पर दर्द होता है तो यह सामान्य नहीं है।
उंगलियां चटकाने के बाद अगर दर्द, सूजन या उंगली के टेढ़े होने जैसी स्थिति हो तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए। ऐसी स्थिति में लिगामेंट को नुकसान या उंगली के जोड़ के खिसकने जैसी समस्या हो सकती है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।