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Celiac Disease: खाना खाने के बाद पेट की परेशानी और लगातार थकान? मेयो क्लिनिक से जानें सीलिएक डिजीज के ये संकेत

Celiac Disease Cause: खाना खाते ही पेट फूलना और दिनभर सुस्ती? यह साधारण गैस नहीं, सीलिएक डिजीज का इशारा हो सकती है। मेयो क्लिनिक, नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ डायबिटीज एंड डाइजेस्टिव किडनी डिजीज और क्लीवलैंड क्लिनिक से जानें कैसे गेहूं का ग्लूटेन आपकी आंतों को नुकसान पहुंचाता है और इससे राहत पाने का सही तरीका।
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भारत

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Nidhi Yadav

Aug 21, 2026

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खाना खाते ही पेट क्यों फूल जाता है- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Magnific)

Celiac Disease Hindi: रोजाना पेट में गैस बनना, खाना खाने के बाद पेट फूलना और बिना किसी भारी काम के भी दिनभर शरीर में थकान महसूस होना आजकल बहुत आम बात मान ली जाती है। ज्यादातर लोग इसे सिर्फ गलत खान-पान, मैदे वाली चीजें खाने या काम के स्ट्रेस का नतीजा समझकर टाल देते हैं। कई लोग तो महीनों तक चूरन, हाजमे की गोलियां या एंटासिड खाकर काम चलाते रहते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मेयो क्लिनिक के अनुसार, गेहूं की रोटी, दलिया या ब्रेड खाते ही पेट का बार-बार खराब होना किसी आम गैस का नहीं, बल्कि सीलिएक डिजीज (Celiac Disease) का इशारा हो सकता है? यह कोई साधारण एलर्जी या पेट की खराबी नहीं है। यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जो आपके ही शरीर के डिफेंस सिस्टम (इम्यूनिटी) को आपके खिलाफ कर देती है। नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ डायबिटीज एंड डाइजेस्टिव किडनी डिजीज के अनुसार, सीलिएक रोग छोटी आंत को नुकसान पहुंचाता है। दुनिया भर में लगभग 1 प्रतिशत लोग सीलिएक रोग से ग्रसित हैं। आइए जानते हैं कि यह बीमारी क्या है और शरीर हमें क्या संकेत देने की कोशिश करता है।

क्या है सीलिएक डिजीज (Celiac Disease) और यह पेट को कैसे नुकसान पहुंचाती है?

क्लीवलैंड क्लिनिक की मेडिकल रिसर्च के मुताबिक, सीलिएक डिजीज एक ऐसी स्थिति है जिसमें इंसान का शरीर ग्लूटेन (Gluten) नाम के प्रोटीन को पचा नहीं पाता। यह ग्लूटेन प्रोटीन मुख्य रूप से हमारे रोज के खाने जैसे गेहूं, जौ (Barley) और राई (Rye) में पाया जाता है। जब सीलिएक डिजीज से पीड़ित इंसान गेहूं की रोटी या इससे बनी कोई चीज खाता है, तो उसके शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) गलती से गेहूं को एक दुश्मन मान लेती है। इस वजह से शरीर छोटी आंत (Small Intestine) पर हमला कर देता है। हमारी आंतों के अंदर उंगलियों जैसे छोटे-छोटे विलाई (Villi) होते हैं, जो खाने से विटामिन्स और पोषक तत्वों को खींचकर खून तक पहुंचाते हैं। ग्लूटेन खाने से ये विलाई धीरे-धीरे छिलकर खत्म होने लगते हैं, जिससे आंतें खाने का पोषण सोखना बंद कर देती हैं।

सीलिएक डिजीज के मुख्य संकेत और लक्षण

  • खाना खाते ही पेट का फूलना और गैस।
  • बार-बार दस्त होना या कब्ज।
  • बिना वजह लगातार थकान और कमजोरी।
  • अचानक वजन का कम होना।
  • खून की कमी (Anemia)।
  • हड्डियों में दर्द और त्वचा पर दाने।

यह आम फूड एलर्जी से कैसे अलग है?

बहुत से लोग सीलिएक डिजीज को साधारण गेहूं की एलर्जी समझ लेते हैं, जबकि दोनों में बड़ा फर्क है। गेहूं की एलर्जी होने पर सांस लेने में दिक्कत, गले में सूजन या तुरंत त्वचा पर पित्ती (Hives) जैसे लक्षण आते हैं। वहीं सीलिएक डिजीज सीधे आपकी आंतों को अंदर से नुकसान पहुंचाती है और धीरे-धीरे पूरे शरीर को पोषाहार से वंचित कर देती है। अगर इसे अनदेखा किया जाए, तो आगे चलकर हड्डियां कमजोर होना (ऑस्टियोपोरोसिस) और नसों में कमजोरी जैसी गंभीर परेशानियां हो सकती हैं।

इसकी पहचान कैसे होती है और क्या है सही इलाज?

अगर आपको ऊपर बताए गए लक्षण काफी समय से महसूस हो रहे हैं, तो अपने मन से खाना छोड़ देने के बजाय सही डॉक्टरी जांच कराएं;

1.ब्लड टेस्ट (tTG-IgA Test)- डॉक्टर सबसे पहले खून की जांच के ज़रिए शरीर में मौजूद खास एंटीबॉडीज़ का पता लगाते हैं।

आंत की एंडोस्कोपी (Endoscopy)- खून की जांच पॉजिटिव आने पर छोटी आंत का छोटा सा सैंपल लेकर देखा जाता है कि विलाई को कितना नुकसान पहुंचा है।

2. ग्लूटेन फ्री डाइट (Gluten-Free Diet)- सीलिएक डिजीज के लिए कोई गोली या सिरप नहीं आता। इसका सबसे असरदार और पक्का इलाज यही है कि आप अपने खाने से गेहूं, जौ और राई से बनी चीज हटा दें।

ग्लूटेन वाली चीजें बंद करते ही कुछ ही दिनों में आंतें खुद-ब-खुद ठीक होने लगती हैं, पेट का फूलना बंद हो जाता है और शरीर की थकान दूर होने लगती है। आप गेहूं की जगह बाजरा, ज्वार, मक्का, रागी, चावल और कुट्टू के आटे का इस्तेमाल आसानी से कर सकते हैं।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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