21 अगस्त 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

अचानक पीठ में उठता है तेज दर्द? क्लीवलैंड क्लिनिक से जानें Back Spasms क्यों होते हैं और कैसे पाएं राहत

Back Spasm Cause: पीठ में अचानक खिंचाव या ऐंठन (Back Spasms) से परेशान हैं? जानिए क्लीवलैंड क्लिनिक और हेल्थलाइन के अनुसार, इसके मुख्य कारण, तुरंत दर्द से राहत पाने के उपाय और डॉक्टर को कब दिखाना जरूरी है।
3 min read
Google source verification

भारत

image

Nidhi Yadav

Aug 21, 2026

Back Spasms Causes,Lower Back Muscle Twitching,Relief for Back Spasms,

पीठ में ऐंठन क्यों आती है- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)

Back Spasm Symptoms: क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि आप जमीन से कोई सामान उठाने झुके और अचानक पीठ में इतना तेज झटका या दर्द महसूस हुआ कि सीधा खड़ा होना भी मुश्किल हो गया? अगर हां, तो आप अकेले नहीं हैं। आम बोलचाल में जिसे हम पीठ की नस चढ़ना, लचक आना या मांसपेशी का एंठना कहते हैं, उसे मेडिकल विज्ञान में Back Spasms (बैक स्पैज्म) कहा जाता है। यह दर्द इतना अचानक और तीव्र होता है कि इंसान पल भर के लिए सांस तक रोक लेता है। लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है! आइए जानते हैं कि पीठ में यह ऐंठन क्यों आती है और घर पर ही इससे तुरंत राहत कैसे पाई जा सकती है।

आखिर क्या होता है Back Spasm (पीठ की ऐंठन)?

क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, जब हमारी पीठ की मांसपेशियां (muscles) अचानक अपनी इच्छा के बिना बहुत तेजी से सिकुड़ जाती हैं और ढीली (relax) नहीं हो पातीं, तो उसे बैक स्पैज्म कहते हैं। यह रीढ़ की हड्डी की सुरक्षा के लिए शरीर का एक प्राकृतिक रिएक्शन (रक्षा तंत्र) भी हो सकता है। जब रीढ़ की हड्डी को किसी खतरे या खिंचाव का अहसास होता है, तो आसपास की मांसपेशियां कस जाती हैं ताकि हड्डी को और नुकसान न पहुंचे। यह ऐंठन कुछ सेकंड से लेकर कई मिनटों तक रह सकती है और इसका असर कुछ दिनों तक महसूस होता रहता है।

पीठ में अचानक ऐंठन क्यों उठती है?

हेल्थलाइन के अनुसार, पीठ में ऐंठन आने के पीछे कई आम और गंभीर कारण हो सकते हैं;

1.मांसपेशियों में खिंचाव या ओवरयूज- अचानक भारी सामान उठाना, जिम में बिना सही तकनीक के वेट लिफ्टिंग करना या खेल-कूद के दौरान एकदम से मुड़ जाना मांसपेशियों को नुकसान पहुंचाता है।

2. गलत पोस्चर (उठने-बैठने का तरीका)- घंटों एक ही जगह पर झुककर बैठना, कंप्यूटर पर गलत तरीके से काम करना या लेटे-लेटे मोबाइल चलाना पीठ की मांसपेशियों पर लगातार दबाव डालता है, जिससे वे कमजोर होकर एंठने लगती हैं।

3. कमजोर कोर मसल्स- अगर पेट और पीठ के निचले हिस्से की मांसपेशियां (core muscles) मजबूत नहीं हैं, तो रीढ़ की हड्डी का पूरा भार पीठ पर आ जाता है, जिससे स्पैज्म का खतरा बढ़ जाता है।

4. शरीर में पानी और मिनरल्स की कमी- पर्याप्त पानी न पीने (dehydration) से और शरीर में कैल्शियम, पोटैशियम व मैग्नीशियम जैसे जरूरी मिनरल्स की कमी होने से मांसपेशियां सही से काम नहीं कर पातीं।

5. रीढ़ की हड्डी से जुड़ी अंदरूनी समस्याएं- कई बार मांसपेशियों की ऐंठन रीढ़ की हड्डी के अंदर छिपी समस्या का संकेत होती है जैसे कि स्लिप डिस्क (herniated disc), स्पोंडिलोसिस या आर्थराइटिस। जब डिस्क में कोई गड़बड़ी होती है, तो मांसपेशियां खुद-ब-खुद कस जाती हैं।

6. मानसिक तनाव और एंजाइटी- अत्यधिक मानसिक तनाव के दौरान हमारे शरीर की मांसपेशियां लगातार कसी (stiff) रहती हैं, जो आगे चलकर अचानक तेज दर्द का रूप ले लेती हैं।

दर्द उठते ही तुरंत क्या करें?

अगर आपको या परिवार में किसी को अचानक पीठ में स्पैज्म आ जाए, तो इन उपायों को अपनाएं;

  • अचानक गतिविधियां बंद करें और आराम करें।
  • बर्फ की सिकाई (Cold Therapy)।
  • गर्म सिकाई (Heat Therapy)।
  • हल्की स्ट्रेचिंग और टहलना।
  • भरपूर पानी और ओआरएस/नारियल पानी।

भविष्य में Back Spasms से बचाव कैसे करें?

  • वजन सही तरीके से उठाएं।
  • डेस्क वर्क में ब्रेक लें।
  • नियमित व्यायाम।
  • पोषक तत्वों से भरपूर डाइट।

डॉक्टर से परामर्श कब लेना बेहद जरूरी है?

  • दर्द पीठ से निकलकर पैरों, जांघों या पंजों तक नीचे जा रहा हो।
  • पैर या पंजे सुन्न (numb) पड़ रहे हों या उनमें झुनझुनी/कमज़ोरी महसूस हो रही हो।
  • पेशाब या शौच (bowel and bladder control) करने पर आपका नियंत्रण खत्म होने लगे।
  • पीठ दर्द के साथ बुखार, उल्टी या अचानक वजन घटने लगे।
  • 1 से 2 सप्ताह तक लगातार देखभाल के बाद भी दर्द में कोई सुधार न आए।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

बड़ी खबरें

View All

स्वास्थ्य

ट्रेंडिंग

लाइफस्टाइल