स्वास्थ्य

कम पानी पीने से होता है कान के नीचे गांठ का बनने का खतरा

दरअसल हमारे कान व जबड़े के नीचे आगे की ओर तीन प्रमुख लार गं्रथियां होती हैं। कई बार कम पानी पीने से लार गाढ़ी हो जाती है।
2 min read
• •
Updated: 14 Sep 2017, 1:55 PM IST
less-drinking-water-lumps-can-makes-under-the-ear
दरअसल हमारे कान व जबड़े के नीचे आगे की ओर तीन प्रमुख लार गं्रथियां होती हैं। कई बार कम पानी पीने से लार गाढ़ी हो जाती है।

कई बार लोग कान के नीचे गांठ या दर्द की समस्या को कान की समस्या समझ लेते हैं लेकिन इसकी वजह लार ग्रंथियों से जुड़ी हो सकती है। दरअसल हमारे कान व जबड़े के नीचे आगे की ओर तीन प्रमुख लार गं्रथियां होती हैं। कई बार कम पानी पीने से लार गाढ़ी हो जाती है। इसके कारण इन ग्रंथियों में संक्रमण,पथरी व गांठ बनने की समस्या हो सकती है-


संक्रमण : यह किसी को भी हो सकता है लेकिन किडनी व लिवर रोग से पीडि़त,कमजोर इम्युनिटी वाले,डायबिटीज,आर्थराइटिस व एचआईवी रोगियों में इसकी आशंका अधिक होती है। इसकी वजह लार गाढ़ी होने के कारण पनपे वायरस व बैक्टीरिया,मुंह की साफ-सफाई की कमी आदि हो सकती हैं। ऐसे में खाने में स्वाद न आना, मुंह से पस निकलना, बुखार व कान के पास दर्द जैसे लक्षण सामने आते हैं।


पथरी : लार का गाढ़ा होकर कठोर होना ग्रंथियों में कई बार पथरी का रूप ले लेता है। इससे लार के प्रवाह में बाधा आ जाती है। हालांकि इसका कोई ठोस प्रमाण नहीं है। लेकिन पानी की कमी व प्रमुख रोगों में ली जाने वाली दवाओं का दुष्प्रभाव भी इसके कारणों में शामिल है। पथरी होने पर भोजन निगलने में दिक्कत, ग्रंथियों का फूलना और दर्द की परेशानी सामने उभर कर आती है।


गांठें बनना : गांठें दो तरह की होती हैं-कैंसरस व नॉन-कैंसरस। कई बार पानी की कमी से नाजुक कोशिकाएं कठोर हो जाती हैं। इलाज में देरी होने से ये ट्यूमर का रूप ले सकती हैं। ऐसे में कान या जबड़े के पास भोजन करते समय दर्द,सूजन,मुंह में टेढ़ापन व आंखें बंद न कर पाने जैसी दिक्कतें होती हैं।


जांच व इलाज : संक्रमण होने पर एंटीबायोटिक दवाएं देते हैं। सीटी स्कैन,एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड से पथरी का पता लगाकर जरूरत पडऩे पर सर्जरी से पथरी निकालते हैं। गांठ बनने पर ब्लड टैस्ट,एफएनएसी (पतली सुई को गांठ में डालकर उसके अंदर का तरल निकालते हैं और उसे लैब में टैस्ट करते हैं),एमआरआई कर गांठों की संख्या व फैलाव पता लगाकर गांठ को बाहर निकालते हैं। मौसम कोई भी हो सावधानी के तौर पर विशेषज्ञ दिन में ७-८ गिलास पानी पीने की सलाह देते हैं। इसके अलावा ज्यूस या सूप भी लिया जा सकता है।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
Published on:
Also Read
View All
आंखें अपने आप बार-बार बंद होने लगती हैं, क्या है यह अनोखा न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर?

Adulterated Mithai: दिवाली पर असली और नकली मिठाई की पहचान कैसे करें, जानें सेहत के खतरे और शिकायत का तरीका

Mouth Breathing: सोते समय मुंह खुला रह जाता है और नाक की जगह मुंह से लेते हैं सांस, वेबएमडी से जानें कौनसी समस्याएं हो सकती है

Sun Allergy: धूप में निकलते ही आने लगती हैं छींकें? हार्वर्ड हेल्थ से जानें क्यों रोशनी पड़ते ही सक्रिय हो जाती है नाक

Misophonia: खाना चबाने या सांस लेने की आवाज से चिढ़ जाते हैं, क्लीवलैंड क्लिनिक से जानिए क्या है मिसोफोनिया और क्यों होती है यह समस्या