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Misophonia: खाना चबाने या सांस लेने की आवाज से चिढ़ जाते हैं, क्लीवलैंड क्लिनिक से जानिए क्या है मिसोफोनिया और क्यों होती है यह समस्या

Misophonia Cause: क्या खाने की आवाज या सांस लेने से आपको तेज गुस्सा आता है? क्लीवलैंड क्लिनिक और वेबएमडी से जानें क्या है मिसोफोनिया, इसके लक्षण और इससे निपटने के उपाय।
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भारत

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Nidhi Yadav

•

Updated: 31 Oct 2026, 8:52 AM IST

A person feeling annoyed and covering their ears due to triggering sounds like chewing or breathing

मिसोफोनिया से पीड़ित लोगों को खाना चबाने या सांस लेने जैसी सामान्य आवाजों से भी अत्यधिक मानसिक झुंझलाहट और गुस्सा आ सकता है- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)

Misophonia Symptoms: क्या आपके आस-पास कोई शख्स जब जोर-जोर से चिप्स चबाता है, पेन का ढक्कन बार-बार खटखटाता है, सांस खींचता है या सूप की चुस्कियां लेता है, तो आपका खून खौल उठता है? क्या ऐसी आवाजें सुनते ही आपके मन में अचानक तेज गुस्सा, बेचैनी या वहां से भाग जाने का मन करने लगता है? अगर इन सवालों का जवाब हां है, तो आप सिर्फ चिड़चिड़े नहीं हैं, बल्कि आप एक खास स्थिति पीड़ित भी हो सकते हैं जिसे मेडिकल भाषा में मिसोफोनिया (Misophonia) कहा जाता है। आइए समझतें है कि यह समस्या आखिर क्या है और इसका दिमाग से क्या कनेक्शन है।

क्या है मिसोफोनिया और यह क्यों होता है?

मिसोफोनिया का सीधा मतलब होता है- आवाजों से नफरत। यह सिर्फ सामान्य आवाज से होने वाली परेशानी नहीं है, बल्कि कुछ खास तरह की रोजमर्रा की आवाजों (जिसे 'ट्रिगर साउंड्स' कहते हैं) पर दिमाग की एक अत्यधिक तीव्र प्रतिक्रिया है। वेबएमडी के मुताबिक, जब कोई व्यक्ति ऐसी आवाजें सुनता है, तो उसके दिमाग का 'फाइट ऑर फ्लाइट' (लड़ो या भागो) वाला सिस्टम अचानक एक्टिव हो जाता है। यानी शरीर को ऐसा खतरा महसूस होता है जैसे सामने कोई बड़ी आफत आ गई हो। यही वजह है कि ऐसी आवाजें सुनते ही दिल की धड़कन तेज हो जाती है, हथेलियों में पसीना आने लगता है और काबू से बाहर गुस्सा आने लगता है।

इसके मुख्य लक्षण और आम ट्रिगर आवाजें

क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, मिसोफोनिया से पीड़ित हर व्यक्ति के ट्रिगर अलग हो सकते हैं, लेकिन ज्यादातर मामलों में ये आवाजें सबसे ज्यादा परेशान करती हैं;

  • जोर-जोर से खाना चबाना, खाने की आवाज, होंठ चपकाना या पानी की चुस्की लेना।
  • नाक सुड़कना, गहरी या जोर से सांस लेना, या खर्राटे।
  • पेन क्लिक करना, लगातार कीबोर्ड टाइप करना, घड़ी की टिक-टिक या पैरों को थपथपाना।

जब कोई पीड़ित इन आवाजों को सुनता है, तो उसे भारी झुंझलाहट, मानसिक अशांति और कभी-कभी खुद पर या सामने वाले पर गुस्सा कंट्रोल न कर पाने जैसी स्थिति का सामना करना पड़ता है।

क्या यह सिर्फ चिड़चिड़ापन है या कोई बीमारी?

लंबे समय तक लोग इसे महज खराब स्वभाव या गुस्सा मान लेते थे। लेकिन क्लेवलैंड क्लिनिक के विशेषज्ञों का कहना है कि यह न्यूरोलॉजिकल और साइकोलॉजिकल से जुड़ी एक स्थिति है। इसमें कान का पर्दा खराब नहीं होता, बल्कि कान से दिमाग तक आवाज पहुंचाने वाले सिग्नल और भावनाओं को कंट्रोल करने वाले हिस्से (जैसे एमिग्डाला) के बीच का तालमेल अतिसंवेदनशील हो जाता है।

इससे निपटने और राहत पाने के तरीके

मिसोफोनिया का कोई पक्का इलाज या दवा अभी पूरी तरह तय नहीं है, लेकिन कुछ व्यावहारिक तरीकों से इसे काफी हद तक मैनेज किया जा सकता है;

  • साउंड मास्किंग (Noise Masking)।
  • अपनों को समझाएं।
  • तनाव प्रबंधन।
  • थैरेपी की मदद लें।
डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

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