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Pins and Needles Sensation: थोड़ी देर बैठकर उठते ही पैरों में चींटियां चलने का एहसास किस कारण से होता है, हेल्थलाइन से जानें बचाव के उपाय

Pins and Needles Sensation: उठते ही पैरों में चींटियां चलना या सुन्नपन महसूस होना क्या है? हेल्थलाइन और क्लीवलैंड क्लिनिक से जानिए पारेस्थेसिया के लक्षण, कारण और इससे जुड़ी जरूरी मेडिकल सावधानियां।
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भारत

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Nidhi Yadav

•

Updated: 30 Oct 2026, 6:42 PM IST

उठने के बाद पैरों में सुन्नपन, झनझनाहट और चींटियां चलने (पारेस्थेसिया) की समस्या को दर्शाती महिला की तस्वीर

लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने के बाद अचानक उठने पर पैरों में होने वाली झनझनाहट को पारेस्थेसिया कहा जाता है, जो आमतौर पर कुछ ही सेकंड में ठीक हो जाती है- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)

Paaron Mein Cheetiya Chalna: कभी-कभी जमीन पर पैरों को मोड़कर बैठने या ऑफिस की कुर्सी पर लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठे रहने के बाद जब हम अचानक उठते हैं, तो पैरों में एक अजीब सी सुन्नता, चुभन या ऐसा अहसास होता है जैसे मानो अनगिनत चींटियां चल रही हों। हम इसे पैर का सो जाना कहते हैं। ज्यादातर लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं और कुछ ही सेकंड में जब सामान्य चाल लौट आती है, तो भूल जाते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है और क्या यह किसी अंदरूनी समस्या का इशारा हो सकता है? मेडिकल साइंस में इस स्थिति को पारेस्थेसिया (Paresthesia) कहा जाता है।

आखिर पैरों में चींटियां क्यों चलती हैं?

क्लीवलैंड क्लिनिक की रिपोर्ट के अनुसार, जब आप देर तक एक ही स्थिति में बैठते हैं, तो आपके शरीर का वजन उस हिस्से की नसों (Nerves) और रक्त वाहिकाओं (Blood Vessels) पर दबाव डालता है। इस दबाव के कारण पैरों तक ऑक्सीजन और पोषक तत्व ले जाने वाला ब्लड सर्कुलेशन और नसों के जरिए दिमाग तक सिग्नल भेजने की प्रक्रिया कुछ समय के लिए बाधित हो जाती है। इसे तकनीकी भाषा में ऑबडोर्मिशन (Obdormition) कहा जाता है। जैसे ही आप अपनी पोजीशन बदलते हैं और दबाव हटता है, नदियां जैसे अचानक दोबारा बहने लगती हैं ठीक वैसे ही नसें फिर से सक्रिय हो जाती हैं। इसी अचानक बहाव और तंत्रिका तंत्र के दोबारा एक्टिव होने की प्रक्रिया को हम झनझनाहट या 'चींटियां चलने' के रूप में महसूस करते हैं।

कब तक यह सामान्य है और कब चिंता की बात?

हेल्थलाइन के मुताबिक, ज्यादातर मामलों में यह क्षणिक (Transient) पारेस्थेसिया होता है, जो पूरी तरह हानिरहित है और पोजीशन बदलते ही अपने आप ठीक हो जाता है। इसमें घबराने की कोई बात नहीं होती। लेकिन, अगर यह समस्या बिना किसी वजह के अचानक बार-बार होने लगे, लंबे समय तक बनी रहे, या फिर इसके साथ पैरों में कमजोरी, सुन्नपन और उठने-बैठने में संतुलन बिगड़ने जैसी दिक्कतें भी महसूस हों, तो इसे नजरअंदाज बिल्कुल नहीं करना चाहिए। यह पर्सिस्टेंट (Persistent) पारेस्थेसिया का संकेत हो सकता है, जो शरीर के भीतर किसी बड़ी स्वास्थ्य समस्या का इशारा करता है।

किन समस्याओं का संकेत हो सकता है लगातार पारेस्थेसिया?

  • विटामिन्स की कमी।
  • नसों पर दबाव या डैमेज।
  • डायबिटीज (मधुमेह)।
  • रक्त संचार (Blood Circulation) में रुकावट।

बचाव और राहत के उपाय

  • लंबे समय तक न बैठें।
  • सही पॉश्चर अपनाएं।
  • संतुलित खान-पान।
  • हाइड्रेटेड रहें।

थकान भरी दिनचर्या के बीच पैरों का सुन्न होना या चींटियां चलना हमें अक्सर एक मामूली और अनदेखी करने वाली बात लग सकती है। लेकिन, जैसा कि मेडिकल साइंस और एक्सपर्ट्स बताते हैं, शरीर की हर छोटी सी प्रतिक्रिया के पीछे कोई न कोई वजह जरूर छिपी होती है। अगर यह परेशानी महज कुछ सेकंड में ठीक हो जाती है, तो यह केवल शरीर की स्वाभाविक प्रतिक्रिया यानी क्षणिक पारेस्थेसिया है, जिससे डरने की कोई जरूरत नहीं है।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

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