
लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने के बाद अचानक उठने पर पैरों में होने वाली झनझनाहट को पारेस्थेसिया कहा जाता है, जो आमतौर पर कुछ ही सेकंड में ठीक हो जाती है- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)
Paaron Mein Cheetiya Chalna: कभी-कभी जमीन पर पैरों को मोड़कर बैठने या ऑफिस की कुर्सी पर लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठे रहने के बाद जब हम अचानक उठते हैं, तो पैरों में एक अजीब सी सुन्नता, चुभन या ऐसा अहसास होता है जैसे मानो अनगिनत चींटियां चल रही हों। हम इसे पैर का सो जाना कहते हैं। ज्यादातर लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं और कुछ ही सेकंड में जब सामान्य चाल लौट आती है, तो भूल जाते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है और क्या यह किसी अंदरूनी समस्या का इशारा हो सकता है? मेडिकल साइंस में इस स्थिति को पारेस्थेसिया (Paresthesia) कहा जाता है।
क्लीवलैंड क्लिनिक की रिपोर्ट के अनुसार, जब आप देर तक एक ही स्थिति में बैठते हैं, तो आपके शरीर का वजन उस हिस्से की नसों (Nerves) और रक्त वाहिकाओं (Blood Vessels) पर दबाव डालता है। इस दबाव के कारण पैरों तक ऑक्सीजन और पोषक तत्व ले जाने वाला ब्लड सर्कुलेशन और नसों के जरिए दिमाग तक सिग्नल भेजने की प्रक्रिया कुछ समय के लिए बाधित हो जाती है। इसे तकनीकी भाषा में ऑबडोर्मिशन (Obdormition) कहा जाता है। जैसे ही आप अपनी पोजीशन बदलते हैं और दबाव हटता है, नदियां जैसे अचानक दोबारा बहने लगती हैं ठीक वैसे ही नसें फिर से सक्रिय हो जाती हैं। इसी अचानक बहाव और तंत्रिका तंत्र के दोबारा एक्टिव होने की प्रक्रिया को हम झनझनाहट या 'चींटियां चलने' के रूप में महसूस करते हैं।
हेल्थलाइन के मुताबिक, ज्यादातर मामलों में यह क्षणिक (Transient) पारेस्थेसिया होता है, जो पूरी तरह हानिरहित है और पोजीशन बदलते ही अपने आप ठीक हो जाता है। इसमें घबराने की कोई बात नहीं होती। लेकिन, अगर यह समस्या बिना किसी वजह के अचानक बार-बार होने लगे, लंबे समय तक बनी रहे, या फिर इसके साथ पैरों में कमजोरी, सुन्नपन और उठने-बैठने में संतुलन बिगड़ने जैसी दिक्कतें भी महसूस हों, तो इसे नजरअंदाज बिल्कुल नहीं करना चाहिए। यह पर्सिस्टेंट (Persistent) पारेस्थेसिया का संकेत हो सकता है, जो शरीर के भीतर किसी बड़ी स्वास्थ्य समस्या का इशारा करता है।
थकान भरी दिनचर्या के बीच पैरों का सुन्न होना या चींटियां चलना हमें अक्सर एक मामूली और अनदेखी करने वाली बात लग सकती है। लेकिन, जैसा कि मेडिकल साइंस और एक्सपर्ट्स बताते हैं, शरीर की हर छोटी सी प्रतिक्रिया के पीछे कोई न कोई वजह जरूर छिपी होती है। अगर यह परेशानी महज कुछ सेकंड में ठीक हो जाती है, तो यह केवल शरीर की स्वाभाविक प्रतिक्रिया यानी क्षणिक पारेस्थेसिया है, जिससे डरने की कोई जरूरत नहीं है।
Published on:
30 Oct 2026, 6:42 PM IST
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