स्वास्थ्य

तेज आवाज का दिल की सेहत पर क्या असर पड़ता है? WHO और NCBI से जानें

Loud Noise Effects: तेज आवाज से शरीर और दिल की सेहत पर क्या असर पड़ सकता है, विश्व स्वास्थ्य संगठन और नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन से आइए जानते हैं।
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Sep 25, 2026
Loud Noise Effects, Heart Health
Loud Noise Effects (Representative Image) Image Credit Magnific

Heart Health: लंबे समय तक बहुत तेज शोर के बीच रहना सिर्फ कानों के लिए ही परेशानी का कारण नहीं हो सकता, बल्कि इसका असर शरीर और दिल की सेहत पर भी पड़ सकता है। ज्यादा शोर शरीर में तनाव की प्रतिक्रिया बढ़ा सकता है और लंबे समय तक शोर के संपर्क में रहने का संबंध ब्लड प्रेशर और हृदय से जुड़ी कुछ समस्याओं से भी पाया गया है। ऐसे में आइए जानते हैं कि तेज आवाज का हृदय के स्वास्थ्य पर किस तरह असर पड़ सकता है।

ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट पर असर

नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन (National Center for Biotechnology Information) पर प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, तेज या लगातार शोर के संपर्क में रहने से शरीर में तनाव की प्रतिक्रिया हो सकती है, जिससे कुछ समय के लिए ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट बढ़ सकते हैं। इसके अलावा लंबे समय तक पर्यावरणीय शोर के संपर्क को हाई ब्लड प्रेशर और हृदय से जुड़ी कुछ बीमारियों के बढ़े हुए जोखिम से जोड़ा गया है।

तेज शोर का दिल पर क्या असर पड़ सकता है

विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) के अनुसार, लंबे समय तक तेज शोर के बीच रहने से शरीर में तनाव बढ़ सकता है। लगातार शोर के कारण शरीर में होने वाली तनाव की प्रतिक्रिया का असर दिल की सेहत पर भी पड़ सकता है। इसके साथ ही शोर से होने वाली परेशानी और तनाव के कारण ब्लड प्रेशर जैसी समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है। इसलिए लगातार तेज शोर के संपर्क में रहने से बचना जरूरी है।

तनाव और नींद पर पड़ सकता है असर

विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) के अनुसार, लगातार तेज शोर में रहने से शरीर पर तनाव बढ़ सकता है। खासकर रात में सोते समय तेज आवाज होने से नींद आने में परेशानी हो सकती है या बार बार नींद खुल सकती है। इससे नींद पूरी नहीं हो पाती और शरीर को जरूरी आराम नहीं मिल पाता। लंबे समय तक ऐसा होने पर इसका असर सेहत पर भी पड़ सकता है।

कितनी तेज आवाज कानों के लिए नुकसानदायक हो सकती है

अमेरिकी रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (Centers for Disease Control and Prevention) के अनुसार, करीब 85 डेसिबल की आवाज में लंबे समय तक या बार बार रहने से सुनने की क्षमता को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ सकता है। वहीं करीब 95 डेसिबल की आवाज में कम समय में भी सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा, नाइटक्लब और बड़े खेल आयोजनों जैसी जगहों पर शोर का स्तर 95 डेसिबल से ज्यादा हो सकता है।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
Updated on:
25 Sept 2026 03:39 pm
Published on:
25 Sept 2026 03:26 pm