स्वास्थ्य

सिगरेट छोड़ दी, फिर भी इन चीजों से रहता है Lung Cancer का खतरा

Lung Cancer Risk Factors: सिगरेट छोड़ने के तुरंत बाद फेफड़ों के कैंसर का खतरा खत्म नहीं होता है। आइए जानते हैं, धूम्रपान के अलावा किन कारणों से फेफड़ों के कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है।
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Aug 12, 2026
Lung Cancer After Quitting Smoking, Lung Cancer Causes
Lung Cancer/ lung cancer istock

Lung Cancer Symptoms: धूम्रपान बंद करने के बाद समय के साथ फेफड़ों के कैंसर का खतरा कम होने लगता है। लेकिन अगर कोई व्यक्ति पहले लंबे समय तक धूम्रपान करता रहा है, तो सिगरेट छोड़ने के बाद भी यह खतरा तुरंत खत्म नहीं होता। वहीं, धूम्रपान न करने वाले लोगों को भी फेफड़ों का कैंसर हो सकता है। आइए जानते हैं कि ऐसा क्यों होता है और सिगरेट के अलावा किन चीजों से फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

सिगरेट छोड़ने के बाद भी क्यों रहता है फेफड़ों के कैंसर का खतरा?

धूम्रपान छोड़ने से फेफड़ों के कैंसर का खतरा कम होता है, लेकिन यह तुरंत सामान्य स्तर पर नहीं आता। रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (Centers for Disease Control and Prevention) के अनुसार, धूम्रपान छोड़ने के बाद फेफड़ों के कैंसर का खतरा धीरे-धीरे कम होने लगता है, लेकिन यह तुरंत खत्म नहीं होता। वहीं “क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार, धूम्रपान छोड़ने के पांच साल के भीतर फेफड़ों के कैंसर का जोखिम कम होना शुरू हो सकता है। इसलिए लंबे समय तक धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के लिए भी इसे छोड़ना फायदेमंद है। इसके अलावा पहले कितने वर्षों तक धूम्रपान किया गया और रोजाना कितनी मात्रा में धूम्रपान किया गया, इससे भी फेफड़ों के कैंसर का जोखिम प्रभावित होता है।

सिगरेट के अलावा इन चीजों से भी बढ़ सकता है फेफड़ों के कैंसर का खतरा

1. दूसरों के सिगरेट पीने से निकलने वाला धुआं

अगर आप खुद सिगरेट नहीं पीते, लेकिन आसपास के लोग लगातार धूम्रपान करते हैं, तो आप तंबाकू के धुएं के संपर्क में आ सकते हैं। इसे परोक्ष धूम्रपान कहा जाता है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (National Health Service) के अनुसार, दूसरे लोगों के तंबाकू के धुएं के लगातार संपर्क में रहने से भी फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

2. रेडॉन गैस

रेडॉन एक प्राकृतिक रेडियोधर्मी गैस है, जो चट्टानों, मिट्टी और पानी में मौजूद यूरेनियम से बन सकती है। यह कुछ इमारतों के अंदर जमा हो सकती है।

3. हानिकारक रसायनों का संपर्क

कुछ लोगों को काम के दौरान ऐसे पदार्थों और रसायनों के संपर्क में रहना पड़ता है, जो फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ा सकते हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (National Health Service) के अनुसार, आर्सेनिक, एस्बेस्टस, बेरिलियम, कैडमियम, कोयले और कोक का धुआं, सिलिका और निकेल जैसे पदार्थों का संपर्क इस जोखिम से जुड़ा हो सकता है।

4. डीजल के धुएं के लंबे समय तक संपर्क

अगर किसी व्यक्ति को लंबे समय तक और बार-बार डीजल के धुएं के संपर्क में रहना पड़ता है, तो यह भी फेफड़ों के कैंसर के जोखिम से जुड़ा हो सकता है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (National Health Service) के अनुसार, कई वर्षों तक डीजल के धुएं के लगातार संपर्क में रहने से फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

5. वायु प्रदूषण

सिर्फ सिगरेट का धुआं ही फेफड़ों के लिए चिंता का कारण नहीं है। रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (Centers for Disease Control and Prevention) के अनुसार, जिन क्षेत्रों में वायु प्रदूषण का स्तर ज्यादा होता है, वहां रहने से भी फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

6. धूम्रपान के दूसरे रूप

सिर्फ सिगरेट ही नहीं, बल्कि सिगार और पाइप जैसे दूसरे तंबाकू उत्पादों का इस्तेमाल भी फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ा सकता है।

7. ई-सिगरेट और धूम्रपान के विकल्प

सिगरेट छोड़ने के बाद कुछ लोग ई-सिगरेट या इलेक्ट्रॉनिक धूम्रपान उपकरणों को पूरी तरह सुरक्षित मान सकते हैं। लेकिन क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार, ई-सिगरेट में मौजूद तरल पदार्थों में ऐसे तत्व हो सकते हैं, जो फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। हालांकि, ई-सिगरेट का इस्तेमाल फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ाता है या नहीं, इस बारे में अभी पूरी तरह स्पष्ट प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।

फेफड़ों के कैंसर के कौन-कौन से लक्षण नजर आ सकते हैं?

फेफड़ों के कैंसर के शुरुआती चरण में हमेशा लक्षण दिखाई दें, ऐसा जरूरी नहीं है। क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार, कई मामलों में बीमारी बढ़ने तक स्पष्ट लक्षण नजर नहीं आते। लक्षण दिखाई देने पर इनमें लगातार या समय के साथ बढ़ती खांसी, सांस लेने में परेशानी, सांस फूलना, सीने में दर्द या बेचैनी, सांस लेते समय घरघराहट, खांसी के साथ खून आना, आवाज में भारीपन, भूख कम होना, बिना वजह वजन कम होना और लगातार थकान शामिल हो सकती है।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

Updated on:
12 Aug 2026 04:41 pm
Published on:
12 Aug 2026 04:41 pm