Hot Flashes Menopause: मेनोपॉज के दौरान होने वाले हॉट फ्लैशेस सिर्फ हार्मोनल बदलाव नहीं, बल्कि दिल की बीमारी का संकेत भी हो सकते हैं। जानें इसके कारण, लक्षण और बचाव के तरीके।
Hot Flashes Menopause: मेनोपॉज के दौरान महिलाओं को हॉट फ्लैशेस होना बहुत आम बात मानी जाती है। अचानक तेज गर्मी लगना, पसीना आना और बेचैनी महसूस होना, इन लक्षणों को अक्सर महिलाएं नजरअंदाज कर देती हैं और सोचती हैं कि यह उम्र का एक सामान्य हिस्सा है। लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसे हल्के में लेना सही नहीं है।
हॉट फ्लैशेस में अचानक शरीर गर्म हो जाता है, खासकर चेहरे, गर्दन और छाती के आसपास। इसके साथ पसीना और दिल की धड़कन तेज होना भी महसूस हो सकता है। यह स्थिति कुछ सेकंड से लेकर कुछ मिनट तक रह सकती है।
आमतौर पर माना जाता है कि मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन हार्मोन कम होने से हॉट फ्लैशेस होते हैं। यह बात सही है, लेकिन पूरी सच्चाई नहीं है। डॉक्टरों के मुताबिक, यह समस्या दिल और ब्लड सर्कुलेशन से भी जुड़ी हो सकती है।
जब हॉट फ्लैश आता है, तो शरीर में एक प्रक्रिया होती है जिसे वेसोमोटर रिस्पॉन्स कहते हैं। इसमें ब्लड वेसल्स (रक्त वाहिकाएं) फैल जाती हैं, दिल की धड़कन तेज हो जाती है और नर्वस सिस्टम एक्टिव हो जाता है। यानी यह सिर्फ गर्मी का एहसास नहीं, बल्कि पूरे शरीर की एक प्रतिक्रिया होती है।
अगर किसी महिला को बार-बार हॉट फ्लैशेस होते हैं, तो यह दिल से जुड़ी शुरुआती समस्याओं का संकेत हो सकता है। जैसे कि ब्लड वेसल्स ठीक से काम नहीं कर रही हों या धमनियां संकरी हो रही हों। यह स्थिति आगे चलकर दिल की बीमारी का खतरा बढ़ा सकती है।
एक्सपर्ट्स के अनुसार, हॉट फ्लैशेस के साथ कई और समस्याएं भी जुड़ी हो सकती हैं, जैसे:
ये सभी चीजें मिलकर दिल की सेहत पर असर डाल सकती हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि हॉट फ्लैशेस को सहना ही एकमात्र रास्ता नहीं है। अगर ये बार-बार हो रहे हैं, तो डॉक्टर से जरूर बात करनी चाहिए। सबसे पहले शरीर की पूरी जांच करानी चाहिए, ताकि ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल और दिल से जुड़े जोखिमों का पता चल सके।
हॉट फ्लैशेस के इलाज के लिए दो तरीके अपनाए जा सकते हैं। लाइफस्टाइल और हेल्थ चेकअप के जरिए दिल से जुड़े जोखिमों को कंट्रोल करना और जरूरत पड़ने पर हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (HRT) लेना। सबसे जरूरी है कि महिलाएं अपने लक्षणों को नजरअंदाज न करें। हॉट फ्लैशेस सिर्फ एक सामान्य परेशानी नहीं, बल्कि शरीर का एक संकेत भी हो सकता है कि अंदर कुछ गड़बड़ है। इसलिए समय रहते सही सलाह और इलाज लेना बेहद जरूरी है।