
ऑक्सफोर्ड इंटरनेट इंस्टीट्यूट की ओर से जारी जर्नल क्लिनिकल साइकोलॉजिकल साइंस में प्रकाशित अध्ययन से पता चला है कि इंटरनेट तकनीक और प्लेटफार्मों के नैगेटिव प्रभावों के बारे में लोकप्रिय धारणाओं के बावजूद इंटरनेट को अपनाया जा रहा है और इसका ब्रेन पर असर भी कम है। यह स्टडी 168 देशों में 15 से 89 वर्ष की आयु के दो मिलियन व्यक्तियों के डेटा के आधार पर की गई है। यहां के प्रोफेसर्स के अनुसार उन्होंने तकनीक और मानव कल्याण के बीच होने वाले प्रभावों को खोजा, लेकिन उन्हें किसी प्रकार के परिणाम नहीं मिले।
गहन डेटा का अध्ययन
शोधकर्ताओं ने समय और जनसंख्या जनसांख्यिकी दोनों के आधार पर वेलबीइंग और इंटरनेट अपनाने पर अब तक के सबसे व्यापक डेटा का अध्ययन किया। हालांकि इंटरनेट के उपयोग के प्रभावों को नहीं जांचा गया, लेकिन इस बात के संकेत जरूर मिल गए हैं कि इसका हैल्थ पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता।
जीवन से संतुष्ट
विभिन्न आयु समूह और जेंडर पर किए गए इस अध्ययन से ये जरूर सामने आया है कि इस अवधि के दौरान महिलाओं की जीवन संतुष्टि में वृद्धि हुई है। रिसर्चर्स ने पाया कि मोबाइल ब्रॉडबैंड अपनाने में वृद्धि से जीवन में अधिक संतुष्टि हुई है। हालांकि अभी इसपर और अध्ययन बाकि है।