Mental Health: भारत में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। भारतीय मनोरोग सोसायटी के 77वें राष्ट्रीय सम्मेलन के अनुसार, देश में 60% मानसिक विकारों के मामले 35 वर्ष से कम उम्र के युवाओं में मिल रहे हैं।
Mental Health: मानसिक बीमारियां अब केवल बड़ी उम्र के लोगों तक सीमित नहीं हैं। कम उम्र में ही मानसिक विकार लोगों को अपनी चपेट में ले रहे हैं। चिंता की बात यह है कि देश में मानसिक रोगों की शुरुआत की औसत उम्र अब महज 19 से 20 वर्ष रह गई है। विशेषज्ञ इसे एक 'साइलेंट महामारी' मान रहे हैं क्योंकि जानकारी के अभाव में 70 से 80% पीड़ितों को समय पर सही इलाज ही नहीं मिल पाता। आइए मनोचिकित्सक डॉक्टर आदित्य सोनी से जानते हैं कि ऐसा किस कारण से हो रहा है और इससे बचने के लिए क्या करना चाहिए।
मानसिक विकार का मतलब है मन या दिमाग की ऐसी स्थिति, जिसमें व्यक्ति की सोचने की शक्ति, स्वभाव और व्यवहार बदलने लगता है। जब कोई व्यक्ति बहुत ज्यादा तनाव, लगातार उदासी या घबराहट के कारण अपने रोज के काम ठीक से नहीं कर पाता, तो उसे मानसिक विकार कहते हैं।
दुनिया में 34.6% मानसिक विकार 14 वर्ष की उम्र से पहले ही शुरू हो जाते हैं। लगभग 48.4% मामले 18 वर्ष तक और 62.5% मामले 25 वर्ष की उम्र तक अपनी जड़ें जमा लेते हैं। 15-29 वर्ष की आयु वर्ग में आत्महत्या मौत का तीसरा सबसे प्रमुख कारण बनकर उभरा है। साल 2011 से 2021 के बीच 18-25 वर्ष के युवाओं में मानसिक तनाव के मामलों में 101.7% की भारी वृद्धि दर्ज की गई है।
डिसक्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालिफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। किसी भी समस्या के समाधान के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह जरूर लें।