स्वास्थ्य

प्रेग्नेंसी में इसलिए होती मॉर्निंग सिकनेस, वैज्ञानिकों ने खोज निकाला भ्रूण से उत्पादित हार्मोन

वैज्ञानिकों की एक टीम ने भ्रूण द्वारा उत्पादित एक हार्मोन की पहचान की है, जो गर्भावस्था के पहले तिमाही में मतली और उल्टी के साथ गंभीर सुबह की बीमारी का कारण बनता है। कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय की टीम ने पाया कि जीडीएफ15 मस्तिष्क स्टेम पर काम करने वाला एक हार्मोन है, जो दस में से सात महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान मतली और उल्टी (एनवीपी) का कारण बनता है।
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Dec 23, 2023
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प्रेग्नेंसी में महिलाओं को मॉर्निंग सिकनेस की समस्या रहती है। सुबह के समय मतली और उल्टी की समस्या रहती है। लगभग 2 प्रतिशत महिलाएं सबसे गंभीर रूप हाइपरमेसिस ग्रेविडेरम (एचजी) से पीड़ित हैं, जिसके कारण वजन कम होना, निर्जलीकरण और अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है। नेचर जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में पाया गया कि गर्भवती महिलाओं में मॉर्निंग सिकनेस की गंभीरता इस संयोजन पर निर्भर करती है कि भ्रूण द्वारा जीडीएफ15 का कितना उत्पादन होता है और गर्भवती होने से पहले मां को इस हार्मोन का कितना जोखिम था।

गर्भ में पल रहा बच्चा कर रहा है हार्मोन का उत्पादन
गर्भ में पल रहा बच्चा उस स्तर पर हार्मोन का उत्पादन कर रहा है जिसकी मां को आदत नहीं है। वह इस हार्मोन के प्रति जितनी अधिक संवेदनशील होगी, उन्हें उतनी ही अधिक मॉर्निंग सिकनेस होगी। टीम ने पाया कि एक दुर्लभ आनुवंशिक संस्करण जो महिलाओं को एचजी के बहुत अधिक जोखिम में डालता है, गर्भावस्था के बाहर रक्त और ऊतकों में हार्मोन के निम्न स्तर से जुड़ा था। इसी तरह, आनुवंशिक रक्त विकार बीटा थैलेसीमिया से पीड़ित महिलाएं, जिसके कारण गर्भावस्था से पहले उनमें स्वाभाविक रूप से जीडीएफ15 का स्तर बहुत अधिक होता है, उन्हें बहुत कम या कोई मतली या उल्टी का अनुभव नहीं होता है।

अब मिलेगा समाधान
शोधकर्ताओं के समान अब जब हम हाइपरमेसिस ग्रेविडेरम के कारण को समझ गए हैं, तो हम प्रेग्नेंट महिलाओं के उस अनुभव को रोकने के लिए प्रभावी उपचार विकसित करने की दिशा में एक कदम करीब आ गए हैं। इस खोज से समस्या का समाधान भी मिलेगा।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
Published on:
23 Dec 2023 01:03 pm