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Dengue Prevention: क्या है वोल्बाचिया तकनीक? डेंगू रोकने के लिए 3.2 करोड़ मच्छर छोड़ेगा Google, जानिए सेहत के लिहाज से यह कितनी सुरक्षित?

Google Mosquito Project: गूगल डेंगू, चिकनगुनिया और जीका जैसी बीमारियों को रोकने के लिए 3.2 करोड़ स्टेराइल मच्छर छोड़ने की तैयारी में है। जानिए कैसे काम करेगी यह तकनीक।

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भारत

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Dimple Yadav

Jun 02, 2026

Dengue, Google, Mosquitoes, Chikungunya,

नई तकनीक को दर्शाती प्रतीकात्मक तस्वीर (photo- chatgtp)

Dengue Prevention Technology: डेंगू, जीका, चिकनगुनिया और वेस्ट नाइल वायरस जैसी मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों को रोकने के लिए गूगल की एक खास पहल चर्चा में है। कंपनी ने अमेरिका में करोड़ों स्टेराइल यानी बांझ मच्छर छोड़ने की अनुमति मांगी है। सुनने में यह अजीब लग सकता है, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि इससे बीमारी फैलाने वाले मच्छरों की संख्या काफी हद तक कम की जा सकती है।

क्या है पूरा मामला?

गूगल की पैरेंट कंपनी Alphabet के डिबग प्रोग्राम ने अमेरिकी सरकार से कैलिफोर्निया और फ्लोरिडा में दो साल तक हर साल 1.6 करोड़ मच्छर छोड़ने की अनुमति मांगी है। यानी कुल मिलाकर 3.2 करोड़ मच्छर छोड़े जा सकते हैं। इन मच्छरों को खास तकनीक से तैयार किया गया है ताकि वे इंसानों को नुकसान पहुंचाए बिना बीमारी फैलाने वाले मच्छरों की आबादी कम कर सकें।

कैसे काम करती है यह तकनीक?

वैज्ञानिक सिर्फ नर (Male) मच्छरों को छोड़ते हैं। अच्छी बात यह है कि नर मच्छर इंसानों को काटते नहीं हैं और न ही कोई बीमारी फैलाते हैं। इन नर मच्छरों में वोल्बाचिया नाम का एक प्राकृतिक बैक्टीरिया डाला जाता है। जब ये मच्छर जंगली मादा मच्छरों के साथ प्रजनन करते हैं, तो उनसे पैदा होने वाले अंडों से बच्चे नहीं निकल पाते। धीरे-धीरे मच्छरों की संख्या कम होने लगती है।

स्वास्थ्य के लिए क्यों है अहम?

एडीज एजिप्टी नाम का मच्छर डेंगू, चिकनगुनिया, जीका और येलो फीवर जैसी बीमारियां फैलाता है। अगर इसकी आबादी कम हो जाती है, तो इन बीमारियों के मामले भी कम हो सकते हैं। गूगल का कहना है कि केवल कीटनाशक (Pesticides) छिड़कने से अब उतना फायदा नहीं हो रहा है। कई जगह मच्छरों में कीटनाशकों के प्रति प्रतिरोध (Resistance) भी बढ़ गया है। ऐसे में यह तकनीक ज्यादा सटीक और पर्यावरण के लिए सुरक्षित विकल्प साबित हो सकती है।

पहले भी मिल चुके हैं अच्छे नतीजे

इस तकनीक का इस्तेमाल सिंगापुर में किया जा चुका है। वहां लाखों वोल्बाचिया वाले नर मच्छर छोड़े गए थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक एडीज एजिप्टी मच्छरों की संख्या 80-90% तक घट गई। डेंगू के मामलों में 70% से ज्यादा कमी देखी गई।

भारत के लिए क्यों जरूरी है यह खबर?

भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां डेंगू का बोझ सबसे ज्यादा है। हर साल लाखों लोग डेंगू और चिकनगुनिया की चपेट में आते हैं। अगर यह तकनीक बड़े स्तर पर सफल होती है, तो भविष्य में भारत जैसे देशों में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

डिस्क्लेमरः यह लेख केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी उपलब्ध वैज्ञानिक रिपोर्ट्स, शोध अध्ययनों और विशेषज्ञों के बयानों पर आधारित है। गूगल के डिबग प्रोग्राम और स्टेराइल मच्छरों से जुड़ी तकनीक अभी कुछ देशों में परीक्षण और नियामक मंजूरी की प्रक्रिया में है। इसे किसी प्रकार की चिकित्सा सलाह या सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति का अंतिम विकल्प न समझें। डेंगू, चिकनगुनिया, जीका या अन्य मच्छरजनित बीमारियों से बचाव के लिए स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों और डॉक्टरों की सलाह का पालन करें। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या लक्षण की स्थिति में योग्य चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।