स्वास्थ्य

अभी तक इस गंभीर बीमारी का कोई इलाज नहीं, तेजी से बढ़ रहा है मम्प्स का प्रकोप

Mumps outbreak in Kerala : केरल में मम्प्स के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। सिर्फ एक दिन में ही 190 से ज्यादा मामले सामने आए हैं। पिछले महीने राज्य में 2500 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे कई राज्यों में भी पिछले कुछ महीनों में बच्चों में मम्प्स के मामले देखे गए हैं, जिससे अभिभावक चिंतित हैं।
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Mar 14, 2024
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Mumps Outbreak on the Rise No Cure for Serious Disease


केरल में मम्प्स (Mumps) का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। एक ही दिन (10 मार्च) में 190 मामले सामने आए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र को इस बारे में सतर्क कर दिया गया है। पिछले महीने राज्य में 2,500 से अधिक मामले सामने आए थे।

महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना सहित अन्य राज्यों में भी पिछले कुछ महीनों में बच्चों में कण्ठमाला (Mumps) के मामले सामने आए हैं, जिससे ये बीमारी चिंता का विषय बन गई है।

मम्प्स (Mumps) एक वायरल संक्रमण है जो बच्चों और युवाओं को प्रभावित करता है। यह पैरामाइक्सोवायरस के कारण होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, मनुष्य ही एकमात्र ज्ञात प्राणी है जो कण्ठमाला (Mumps) वायरस का शिकार होता है। ये वायरस संक्रमित व्यक्ति के ऊपरी श्वसन तंत्र से निकलने वाली हवा की बूंदों या सीधे संपर्क में आने से फैलता है।

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यह तीव्र बुखार से शुरू होता है, जिसके बाद कान के आसपास दोनों तरफ दर्द और सूजन हो जाती है। शुरुआत में 3 से 4 दिन तक हल्का बुखार, थकान, सिरदर्द और भूख कम लगना होता है। इसके बाद, चेहरे के दोनों तरफ स्थित पैरोटिड ग्रंथियों में सूजन आ जाती है, जिससे गाल और जबड़े में 7 से 14 दिनों तक दर्द, सूजन और तकलीफ रहती है।

फिलहाल, मम्प्सका कोई खास इलाज नहीं है। उपचार में मुख्य रूप से लक्षणों को कम करने पर ध्यान दिया जाता है, जैसे कि:

- खूब सारा तरल पदार्थ पीना
- सूजन कम करने के लिए गालों पर ठंडा सेंप लगाना
- नरम आहार लेना
- आराम करना
गर्भवती महिलाओं को अगर कण्ठमाला हो जाए तो उन्हें डॉक्टर से जरूर सलाह लेनी चाहिए।

बच्चों को मम्प्स से बचाने के लिए MMR (Measles, Mumps and Rubella) का टीका लगवाना जरूरी है। आमतौर पर बचपन में ही ये टीका लगाया जाता है, जो लंबे समय तक सुरक्षा प्रदान करता है।


- बच्चे को पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ पिलाएं।
- नरम आहार दें ताकि चबाने में दर्द न हो।
- पर्याप्त आराम करें।
- सूजन को कम करने के लिए आइस पैक का इस्तेमाल करें।
- दर्द और सूजन को कम करने के लिए डॉक्टर की सलाह पर दवाएं लें।
- संक्रमण से बचाव के लिए साफ-सफाई का ध्यान रखें।
- अगर मामला गंभीर है तो डॉक्टर स्टेरॉयड का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
Updated on:
14 Mar 2024 05:12 pm
Published on:
14 Mar 2024 05:12 pm