
चीन के वुहान शहर (China's Vuhan City) से बीते साल दिसंबर में निकले कोरोना वायरस (Covid-19) ने आज दुनिया भर में 9,225,827 लोगों को संक्रमित कर दिया है। इससे सबसे ज्यादा संक्रमित अमरीका में महामारी के इस संकट में भी लोग अपन बच्चों को वैक्सीन लगवाने के पक्ष में नहीं हैं। हाल ही जर्नल पिडिएट्रिक्स (Journal Paediatrics) में प्रकाशित एक शोध में यह बात सामने आई है। दरअसल, शोध में सामने आया कि अमरीकी माता-पिता (American Parents) बच्चों को गलाए जाने वाले टीके से मिलेन वाली सुरक्षा को लेकर नहीं बल्कि इन्फ्लूएंजा के टीके की प्रभावशीलता को लेकर संदेह कर रहे हैं। शोध के अनुसार केवल 6 फीसदी माता-पिता ही बच्चों को नियमित रूपसे लगने वाले खसरा, गलसुआ और काली खांसी के टीकों की प्रभावशीलता पर सवाल उठाते हैं।
वायरस पर निर्भर प्रभाव
इस शोध में 2176 अमरीकी अभिभावकों को शामिल किया गया था। हालांकि फ्लू वैक्सीन की प्रभावशीलता साल-दर-साल बदलती रहती है। किसी भी फ्लू वैक्सीन की प्रभावशीलता इस पर भी निर्भर करती है कि यह उस वर्ष प्रभावी इन्फ्लूएंजा वायरस के strain के साथ कितनी अच्छी तरह मेल खाता है। वहीं स्वास्थ्य विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि फ्लू वैक्सीन आने वाले सालों में भी इन्फ्लूएंजा के गंभीर लक्षणों के प्रभावों को कम करने का काम करता है, तब भी जब यह उस समय सक्रिय वायरस के स्ट्रेन से बहुत मेल नहीं खाता हो। जैसे 40-60 के दशक में लगे मीजल्स के टीकों के कारण भारत में कोरोना संक्रमण से मौतें जनसंख्या के अनुपात में कम हुई हैं।
60 फीसदी तक कम करता खतरा
अमरीकी रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्रों (CDC) के अनुसार इन्फ्लूएंजा वैक्सीन का फ्लू शॉट्स इस बीमारी के जोखिम को 40 से 60 फीसदी तक कम कर देता है। अमरीका में कोई भी सालाना फ्लू शॉट 6 महीने के बच्चे से लेकर उससे अधिक उम्र के लोगों के लिए अनुशंसित है। लेकिन शोध में पाया गया है कि अधिकांश वर्षों में कम से कम 40 फीसदी अमरीकी किशोरों-युवाओं को फ्लू का टीका लगाया ही नहीं जाता है। इस समस्या को लेकर सीडीसी के सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ विशेष रूप से चिंतित हैं कि क्या इस साल जब कोरोना का सबसे अधिक प्रकोप है सभी अमरीकियों को पर्याप्त फ्लू शॉट्स लग सकेंगे। यह तब और भी गंभीर हो जाता है जब अमरीका में कोरोना वायरस की दूसरी लहर भी दस्तक दे चुकी है।