Necessary medical tests for women : आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में, महिलाएं अक्सर अपनी सेहत की परवाह नहीं कर पाती हैं। काम की भागदौड़, घर की जिम्मेदारियाँ और बच्चों की देखभाल में उलझी रहने के कारण, वे अपनी सेहत की देखभाल के लिए समय निकालने में असमर्थ हो जाती हैं।
Necessary medical tests for women : आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में, महिलाएं अक्सर अपनी सेहत की परवाह नहीं कर पाती हैं। काम की भागदौड़, घर की जिम्मेदारियाँ और बच्चों की देखभाल में उलझी रहने के कारण, वे अपनी सेहत की देखभाल के लिए समय निकालने में असमर्थ हो जाती हैं।
इसलिए, महिलाओं के लिए यह बहुत जरूरी है कि वे अपनी सेहत का पूरा ध्यान रखें और नियमित रूप से अपनी सेहत की (Medical Test) जांच करवाएं। इससे न केवल उनकी सेहत अच्छी रहेगी, बल्कि उनका जीवन भी सुखमय एवं स्वस्थ रहेगा।
पेप स्मीयर टेस्ट
यह टेस्ट गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर की जांच (Medical Test) में सहायक होता है। इस टेस्ट को 21 साल की आयु से ही शुरू करना चाहिए और 65 साल तक हर 3 साल में करवाना चाहिए।
ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग
स्तन कैंसर स्क्रीनिंग वह प्रक्रिया है जिसका उद्देश्य महिलाओं में स्तन कैंसर की शुरुआती लक्षणों को पहचानना है। यह दुखद वास्तविकता है कि स्तन कैंसर महिलाओं में सबसे आम तरीके से प्रकट होता है। इसके लिए महिलाओं को 40 साल की उम्र से प्रतिवर्ष मैमोग्राफी (Medical Test) करवानी चाहिए। उम्र के 30 साल से ही स्तन की नियमित जांच करनी चाहिए और किसी भी गांठ या परिवर्तन को लेकर तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
थायराइड परीक्षण
थायराइड एक ग्लैंड है जो शरीर के मेटाबोलिज्म को नियंत्रित करता है। थायराइड समस्याएं महिलाओं में आमतौर पर पाई जाती हैं। थायराइड परीक्षण द्वारा थायराइड हार्मोन के स्तर की जाँच की जाती है।
ब्लड शुगर टेस्ट
ब्लड शुगर टेस्ट एक महत्वपूर्ण जांच है जो मधुमेह जैसी गंभीर बीमारी की जांच में मदद कर सकती है। यह बीमारी कई अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है। यदि कोई 45 साल की उम्र से अधिक है, तो हर 3 साल में ब्लड शुगर टेस्ट करवाना उचित होता है।
ब्लड प्रेशर टेस्ट
रक्तचाप परीक्षण की जरूरत है। उच्च रक्तचाप हृदय रोग, स्ट्रोक, और किडनी के रोग के खतरे को बढ़ा सकता है। 18 साल की उम्र से हर साल रक्तचाप परीक्षण करवाना चाहिए।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।