
Neonatal Herpes Symptoms: नवजात शिशु बहुत नाजुक होते हैं और उनकी इम्यूनिटी भी काफी कमजोर होती है। ऐसे में छोटी सी भी बीमारी उनके लिए गंभीर रूप ले सकती है। एनएचएस के अनुसार, नियोनेटल हर्पीज (Neonatal Herpes) एक ऐसा इन्फेक्शन है जो नवजात बच्चों को प्रभावित करता है। अगर सही समय पर इसके लक्षणों को न पहचाना जाए, तो यह बच्चे के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। आइए जानते हैं कि इस बीमारी के मुख्य संकेत क्या हैं और आपको कब तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए।
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, नियोनेटल हर्पीज एक दुर्लभ इन्फेक्शन है, जो हर्पीज सिम्प्लेक्स वायरस (HSV) के कारण नवजात शिशु ( birth से लेकर 28 दिन तक के बच्चे) को होता है। वयस्कों या बड़े बच्चों में यह वायरस केवल साधारण छाले या कोल्ड सोर (cold sores) का कारण बनता है, लेकिन नवजात शिशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता (immunity) बहुत कमजोर होने के कारण यह वायरस उनके पूरे शरीर, मस्तिष्क और अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। नियोनेटल हर्पीज के मुख्य लक्षण निम्न हैं;
नवजात के शरीर का तापमान बढ़ना हमेशा एक चिंता का विषय होता है। अगर आपके बच्चे को तेज बुखार है और वह सुस्त नजर आ रहा है, तो इसे सामान्य मौसमी बदलाव समझने की गलती न करें। यह नियोनेटल हर्पीज का एक शुरुआती और प्रमुख संकेत हो सकता है।
अगर बच्चा अचानक से मां का दूध या फार्मूला मिल्क पीना कम कर दे या उसे निगलने में परेशानी हो रही हो, तो यह इस बात का संकेत है कि वह अंदरूनी रूप से असहज है। इन्फेक्शन के कारण बच्चे बहुत ज्यादा रोने लगते हैं, चिड़चिड़े हो जाते हैं या फिर बिल्कुल सुस्त होकर सामान्य से ज्यादा सोने लगते हैं।
नियोनेटल हर्पीज का सबसे स्पष्ट लक्षण है बच्चे के शरीर पर छोटे-छोटे पानी वाले छाले या दाने (Blisters) निकल आना। ये छाले बच्चे की त्वचा, मुंह के अंदर या आंखों के आसपास दिखाई दे सकते हैं। कई बार ये छाले फूटकर घाव का रूप भी ले लेते हैं। आंखों से पानी आना या आंखें लाल होना भी इसका एक लक्षण है।
जैसे-जैसे यह इन्फेक्शन शरीर में फैलता है, यह बच्चे के फेफड़ों और सांस की नली को प्रभावित कर सकता है। अगर आपको लगे कि बच्चा तेजी से सांस ले रहा है, उसे सांस खींचने में मशक्कत करनी पड़ रही है, या उसकी त्वचा का रंग हल्का नीला पड़ रहा है, तो यह बेहद गंभीर स्थिति है।
नियोनेटल हर्पीज एक मेडिकल इमरजेंसी है। ऊपर बताए गए लक्षणों में से अगर एक भी लक्षण आपके नवजात बच्चे में दिखाई दे, तो बिना एक मिनट भी गंवाए तुरंत नजदीकी अस्पताल या शिशु रोग विशेषज्ञ (Pediatrician) के पास जाएं। समय पर एंटीवायरल इलाज मिलने से बच्चे को इस खतरे से पूरी तरह सुरक्षित बचाया जा सकता है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।