स्वास्थ्य

New year Health tips : जानिए…सेहत का 20-20 आयुर्वेदिक फार्मूला

आयुर्वेदिक औषधि शरीर के लिए लाभकारी, कोई नुकसान नहीं होता है। आयुर्वेद में मधुमेह, गठिया, पेट, बवासीर, चर्म रोगों का सटीक इलाज है। आयुर्वेद की जड़ी-बूटियां कमतर नहीं, शरीर को मजबूत बनाती है। कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज आयुर्वेद के ग्रंथों में दर्ज है।

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Dec 29, 2019
New year Health tips

आयुर्वेद में दवा की अपेक्षा ज्यादा थैरेपी देकर गंभीर बीमारियों का इलाज करते हैं। छोटी बीमारियों के लिए किचन बहुत बड़ी फार्मेसी है। इसका सही तरीके से प्रयोग के लिए जानकारी का होना जरूरी है।

सेहतमंद रहने के लिए क्या कहता है आयुर्वेद
शरीर की तीन प्रकृति वात, पित्त व कफ होती है। इसका संतुलन होना बहुत जरूरी है। शरीर में तीनों तत्वों का संतुलन बिगड़ने से व्यक्ति बीमार होता है। प्रकृति अनुसार ही भोजन करें, इससे पोषक तत्वों का बैलेंस बनता है। इसलिए समय से सुपाच्य, पोषकतत्वों से भरपूर आहार लेना चाहिए।
आयुर्वेद को अपनाएंगे तो सेहतमंद हो जाएंगे
आयुर्वेद स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य को और मजबूत करता है। किसी मरीज का इलाज उसकी प्रकृति के अनुसार किया जाता है। इलाज के दौरान आहार, पोषण आयुर्वेद के अनुसार तय करते हैं। यह जानना सबसे ज्यादा जरूरी है कि कब, क्या, कहां, कैसे, कितना खाना है। यह कैलोरी, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट के कांसेप्ट से ज्यादा महत्वपूर्ण है। स्वास्थ रहने के लिए आहार, निद्रा और ब्रह्मचर्य मुख्य स्तंभ है। ऋतु के अनुसार खानपान व जीवनशैली के बारे में जानना जरूरी है। नियमित योग कर अपने स्वास्थ्य को और अच्छा बना सकते हैं। सही तरीके से नींद नहीं लेने की वजह से दिक्कतें ज्यादा बढ़ती है।
आयुर्वेद में रोगी की प्रकृति अनुसार इलाज करते
1,000 ईसा पूर्व में आयुर्वेद चिकित्सा को 8 खंडों में विभाजित है। काय चिकित्सा (मेडिसिन), बाल चिकित्सा, मानसरोग (न्यूरोलॉजी), शल्य चिकित्सा (सर्जरी) और शालक्य चिकित्सा (ईएनटी-दांत), अगद तंत्र (टॉक्सिकोलॉजी),रसायन व वृष्य चिकित्सा भी शामिल है। इन चिकित्सा पद्धतियों के बारे में अलग-अलग ग्रंथों में वर्णन है।

प्रकृति के अनुसार लेंगे आहार तो बनेंगे सेहतमंद
वात प्रकृति के हैं तो मधुर, लवण और अम्ल रस वाले आहार लें। पित्त प्रकृति के हैं तो मधुर, तिक्त व कषाय रस वाले आहार लें। कफ प्रकृति के लोग कटु, तिक्त, कषाय रस वाले आहार ले सकते हैं। अन्य प्रकृति के लोग आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह से ही आहार लें। भोजन में 6 रस मधुर, लवण, अम्ल, कटु, तिक्त व कषाय होते हैं।
मन की सेहत के लिए योग व प्राणायम करें
सुबह 10 मिनट नियमित प्राणायाम और 30 मिनट योगासन करें। अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, भस्त्रिका में से कोई भी कर सकते हैं। सूर्य नमस्कार दो सेट दो बार करें, यह सामान्य एक्सरसाइज है। चिकित्सक की सलाह व प्रशिक्षक की निगरानी में ये आसन करें।

एक्सपर्ट : प्रो.संजीव शर्मा, निदेशक एनआइए, जयपुर

Updated on:
29 Dec 2019 04:15 pm
Published on:
29 Dec 2019 04:12 pm