
चीन के वुहान शहर (CHINA'S VUHAN CITY) से सारी दुनिया में दहशत बनकर फैले कोरोना वायरस के अब तक 24 से ज्यादा स्ट्रेन (COVID-19 Strain) वैज्ञानिकों के सामने आ चुके हैं। हर बार कोरोना ने अपने आरएनए (RNA) में म्यूटेशन (Mutation) के जरिए खुद को पहले से ज्यादा घातक और अपडेट कर लिया। वहीं शुरुआती दिनों में चीन और दुनिया के अन्य देशों के वैज्ञानिकों ने पाया था कि कोरोना वायरस कोविड-19 से संक्रमित व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के संक्रमित होने का खतरा 14 दिनों तक बना रहता है। यही वजह थी कि पूरी दुनिया में लॉकडाउन (Lock Down) और सोशल डिस्टैंसिंग (Social Distancing) के तहत बाहर से आने वाले और सभी संदिग्ध लोगों को कम से कम 14 दिनों के लिए ही आइसोलेट किया जा रहा था। हालांकि एक नए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि अब यह समय घटकर 9 दिन का रह गया है। अगर ऐसा है तो यह सच में खुशखबरी है क्योंकि अब इसके संक्रमण के ज्यादा दिनों तक बने रहने के खतरे से निजात मिल सकती है।
ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने किया दावा
कोरोना के नोवेल कोविड-19 वायरस के संक्रमण से स्वस्थ व्यक्ति के संक्रमित होने की इस अवधि के घटने का दावा करने वाले ब्रिटेन के वैज्ञानिक हैं। अपने शोध में वैज्ञानिकों की टीम ने पाया कि कोरोना वायरस से संक्रमित रोगी से स्वस्थ्य व्यक्तिमें संक्रमण फैलने की आशंका अब नौ दिन बाद खत्म हो जाती है यानी इतने समय बाद रोगी दूसरों में संक्रमण नहीं फैलाता है। शोधकर्ताओं ने अध्ययन के हवाले से कहा कि कोरोना के लगातार म्यूटेशन के कारण नौ दिन बाद वायरस के प्रसार और दूसरों को संक्रमित करने की उसकी क्षमता क्षीण हो जाती है। बीते ६ महीने में यह अब तक की सबसे बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है।
वायरस मौजूद पर नहीं फैलता संक्रमण
अध्ययन के निष्कर्ष में बताया गया है कि ऐसा नहीं है कि नौ दिनों की इस अवधि में वायरस भी नष्ट हो जाता है। लेकिन शरीर में मौजूद रहने के बावजूद नौ दिन बाद कोरोना संक्रमित व्यक्तिसे दूसरों तक संक्रमण नहीं पहुंचता। हालांकि इस दौरान संक्रमित व्यक्ति के नाक, कान, तंत्रिका तंत्र और दिल पर असर पड़ता है। शोधकर्ताओं ने इस निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए करीब 98 पूर्व शोधों के आंकड़ों का analysis और अध्ययन किया। शोधकर्ताओं ने देखा कि कोरोना संक्रमित रोगी केकान-नाक, स्टूल (मल) और गले में वायरस के मौजूद रहने के बावजूद संक्रमण नहीं फैलता है। इसके लिए वैज्ञानिकों ने मध्य-पूर्व (Middle East) में कहर बरपा चुके सार्स सीओवी-2 (SARS-COV-02) के 79 शोधों के अलावा 8 सार्स सीओवी-1 और 11 मार्स सीओवी के शोधों को भी अपने अध्ययन में शामिल किया था।
लेकिन चिंता का कारण यह
अध्ययन में भले ही दुनिया के लिए एक राहत पहुंचाई है लेकिन चिंता की एक बात यह सामने आई है कि कोरोना वायरस संक्रमित व्यक्ति के श्वांस नली में वारस का आरएनए करीब 83 दिन तक मौजूद रहता है। अध्ययन के मुताबिक वायरस का जेनेटिक मैटिरियल यानी आरएनए गले में 17 से 83 दिन तक रह सकता है। हालांकि अच्छी बात यह है कि केवल आरएनए से संक्रमण नहीं फैलता। शोधकर्ताओं ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा कि संक्रमित मरीजों में वायरल लोड बुखार के पहले सप्ताह में बहुत ज्यादा होता है। जिससे, संक्रमण के लक्षण दिखने के शुरुआती पांच दिन में सबसे ज्यादा संक्रमण फैलने का डर बना रहता है।
क्या बदलेंगे क्वारंटीन-आइसोलेशन के नियम?
कोरोना संक्रमण के प्रसार की चेन तोडऩे के लिए लक्षणसामने आते ही रोगी को आइसोलेट करना ही सबसे प्राथमिक और महत्त्वपूर्ण कदम है। लेकिन, क्या इस दावे के बाद आइसोलेशन और क्वारंटीन के नियमों में बदलाव संभव हे? वैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसा फिलहाल हो पाना संभव नहीं है। क्योंकि हर देश और वहां के रहवासियों का डीएनए और सामाजिक परिवेश अलग है। ऐसे में किसी एक देश के आंकड़ों पर हुए शोध दूसरे देश के लिए फिट होंगे ऐसा संभव नहीं। वैज्ञानिकों का कहना है कि असिम्पटोमैटिक मरीज भी शुरुआत में संक्रमण ज्यादा फैलाने के वाहक हो सकते हैं।