स्वास्थ्य

दिल में Pacemaker क्यों लगाया जाता है? NLM से जानिए किन 7 बातों का रखना चाहिए ध्यान

Pacemaker Side Precautions: पेसमेकर लगाने के बाद किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? मेयो क्लिनिक, क्लीवलैंड क्लिनिक और एनएलएम के अनुसार जानें 7 जरूरी देखभाल टिप्स, सावधानियां और फॉलो-अप की जानकारी।
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Jul 08, 2026
Pacemaker After Surgery Care Pacemaker Side Precautions Heart Rhythm Disorder
पेसमेकर लगने के बाद इन 7 बातों का जरूर रखें ध्यान (photo- freepik)

Pacemaker Care Tips: अगर डॉक्टर ने आपको या आपके परिवार के किसी सदस्य को पेसमेकर लगवाने की सलाह दी है, तो घबराना स्वाभाविक है। कई लोगों के मन में सवाल होता है कि आखिर दिल में पेसमेकर क्यों लगाया जाता है? क्या इसके बाद सामान्य जीवन जिया जा सकता है? और किन बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है?

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन (NLM) के अनुसार, पेसमेकर एक छोटा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है, जिसे तब लगाया जाता है जब दिल की धड़कन बहुत धीमी हो जाती है या दिल की विद्युत प्रणाली सही तरीके से काम नहीं करती। इसका काम दिल को सामान्य गति से धड़कने में मदद करना है।

किन परिस्थितियों में लगाया जाता है पेसमेकर?

मेयो क्लिनिक के अनुसार, पेसमेकर की जरूरत हर हृदय रोगी को नहीं होती। इसे आमतौर पर दिल की धड़कन का बहुत धीमा होने पर, दिल की विद्युत प्रणाली में रुकावट होने पर या दिल की धड़कन का अनियमित होने पर और बार-बार चक्कर आना या बेहोश होना, जब इसकी वजह धीमी धड़कन हो तब लगाया जाता है। डॉक्टर ईसीजी, 24 घंटे की धड़कन रिकॉर्ड करने वाली जांच (होल्टर मॉनिटर), हृदय की अल्ट्रासाउंड जांच (टू-डी इको) और अन्य जरूरी जांचों के आधार पर तय करते हैं कि पेसमेकर लगाने की जरूरत है या नहीं।

पेसमेकर लगने के बाद इन 7 बातों का रखें ध्यान

  1. शुरुआती दिनों में भारी वजन न उठाएं

क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, पेसमेकर लगने के बाद कुछ सप्ताह तक जिस तरफ उपकरण लगाया गया है, उस हाथ से भारी सामान उठाने या हाथ को अचानक सिर से ऊपर ले जाने से बचना चाहिए।

  1. घाव को साफ और सूखा रखें

जहां पेसमेकर लगाया गया है, वहां संक्रमण से बचने के लिए डॉक्टर के बताए तरीके से घाव की देखभाल करें। अगर वहां लालपन, पस, सूजन या तेज दर्द हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

  1. समय-समय पर जांच कराते रहें

मेयो क्लिनिक के अनुसार, समय-समय पर पेसमेकर की जांच जरूरी होती है ताकि यह पता चल सके कि उपकरण सही तरीके से काम कर रहा है और उसकी बैटरी ठीक है।

  1. पेसमेकर पहचान पत्र हमेशा साथ रखें

पेसमेकर लगने के बाद मरीज को एक पहचान पत्र दिया जाता है। यात्रा के दौरान या किसी आपातकालीन स्थिति में यह डॉक्टरों के लिए बहुत उपयोगी होता है।

  1. हर डॉक्टर को पेसमेकर के बारे में जरूर बताएं

अगर आपको एमआरआई, कोई ऑपरेशन या दूसरी चिकित्सा प्रक्रिया करानी है, तो पहले डॉक्टर को पेसमेकर के बारे में जरूर बताएं। सभी पेसमेकर एमआरआई जांच के अनुकूल नहीं होते।

  1. इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें

अगर पेसमेकर लगने के बाद भी बार-बार चक्कर आएं, बेहोशी हो, सांस फूलने लगे या धड़कन में असामान्य बदलाव महसूस हो, तो तुरंत हृदय रोग विशेषज्ञ से मिलें।

  1. स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं

पेसमेकर दिल की धड़कन को सामान्य रखने में मदद करता है, लेकिन यह हृदय रोग का पूरा इलाज नहीं है। इसलिए संतुलित भोजन करें, नियमित हल्का व्यायाम करें, धूम्रपान और तंबाकू से दूर रहें तथा डॉक्टर की बताई दवाएं समय पर लेते रहें।

रिसर्च क्या कहती है?

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन (NLM) के अनुसार, सही मरीज में पेसमेकर लगाने से धीमी धड़कन के कारण होने वाली परेशानियां कम हो सकती हैं और जीवन की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है। वहीं मेयो क्लिनिक और क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, पेसमेकर लगने के बाद अधिकांश लोग सामान्य जीवन जी सकते हैं। हालांकि, नियमित जांच, उपकरण की निगरानी और डॉक्टर की सलाह का पालन करना लंबे समय तक स्वस्थ रहने के लिए बेहद जरूरी है।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

Updated on:
08 Jul 2026 12:37 pm
Published on:
08 Jul 2026 12:37 pm