प्रकृति के बीच समय बिताना हमारे लिए सेहत वरदान साबित हो सकता है, खासकर मानसिक स्वास्थय के लिए। प्रकृति में न केवल आपको फिर से जीवंत करने की शक्ति होती है, बल्कि यह आपको सूक्ष्म तरीके से ठीक भी करती है। प्रकृति में समय बिताने से उन्हें अपनी बैटरी को रिचार्ज करने में मदद मिलती है और जीवन के साथ वापस आ जाती है।

शोध में भी सामने आया है की जो लोग अधिक समय पार्क और अन्य प्राकृतिक जगहों पर बिताते हैं वे ज्यादा खुश और स्वस्थ रहते हैं। शोध में यह भी सामने आया कि इसमें एक खास शारीरिक गतिविधी भी अहम भूमिका निभाती है। प्रकृति हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है जिसके बारे में हमें अपने बच्चों को बताना चाहिये। प्रकृति और मनुष्य के बीच बहुत गहरा संबंध है। दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। मनुष्य के लिए धरती उसके घर का आंगन, आसमान छत, सूर्य-चांद-तारे दीपक, सागर-नदी पानी के मटके और पेड़-पौधे आहार के साधन हैं। इतना ही नहीं, मनुष्य के लिए प्रकृति से अच्छा गुरु नहीं है। आज तक मनुष्य ने जो कुछ हासिल किया वह सब प्रकृति से सीखकर ही किया है। छुट्टीयों में हमारे बच्चे अपना सारा दिन टीवी, मोबईल फोन, कम्प्यूटर खेलों में खराब कर देते है लेकिन वह भूल जाते है कि दरवाजे के बाहर प्रकृति के गोद में भी बहुत कुछ रोचक है उनके लिये।
निस्वार्थ जीना सिखाती है प्रकृति
प्रकृति की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वह किसी के साथ भेदभाव या पक्षपात नहीं करती है। सुबह जल्दी प्रकृति के गोद में ठहलने से बच्चे स्वस्थ और मजबूत बनते है साथ ही ये उनहे कई सारी घातक बीमारीयों जैसे डायबिटिज, स्थायी हृदय घात, उच्च रक्त चाप, लीवर संबंधी परेशानी, पाचन संबंधी समस्या, संक्रमण, दिमागी समस्याओं आदि से भी दूर रखता है। ये हमारे स्वास्थ्य के लिये अच्छा है कि हम चिड़ियों की मधुर आवाज, मंद हवा की खनखनाहट, ताजी हवा की सनसाहट, बहती नदी की आवाज आदि सुबह - सुबह सुनें। शहर के जीवन से दूर होने और प्रकृति के साथ होने में कुछ बात है। यह बेचैन लोगों को तक शांत करता है और लोगों को उस बटन को रीसेट करने में मदद करता है जिसे जीवन कहा जाता है।
ज़्यादा खुश रहते हैं प्रकृति के नज़दीक रहने वाले
हाल ही 'नेचर साइंटिफिक रिपोर्ट्स' नामक पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, पेड़-पौधों के बीच बनी सड़क पर टहलने या किसी रमणीक प्राकृतिक जगह पर सप्ताह में 120 मिनट बिताने वाला व्यक्ति ज्यादा स्वस्थ और खुश महसूस करता है। शोध में यह भी सामने आया कि इससे कम समय बिताने वाले व्यक्ति को कोई महत्वपूर्ण लाभ नहीं हुआ। लेकिन जो लोग रोज 2 से 3 घंटे हरियाली और पेड़ों के झुरमुठ के बीच चहलकदमी करते थे वे उन लोगों की तुलना में 20 फीसदी ज्यादा खुश और सेहतमंद थे जो ऐसा बिल्कुल भी नहीं करते थे। शारीरिक स्वास्थ्य पर इसके फायदे और भी ज्यादा थे। बाहर घूमने वालों की सेहत अनियमित दिनचर्या वाले उनके साथियों की तुलना में 60 फीसदी अधिक थी। शोधकर्ताओं ने कहा कि पार्क और हरियाली वाले क्षेत्र में प्रतिदिन दो घंटे से ज्यादा समय बिताने वालों में हृदय रोग, मधुमेह, मोटापा, अस्थमा, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं और मृत्यु के जोखिम कम थे।
बच्चों को लाएं प्रकृति के क़रीब
जापान में हुए एक शोध में पाया गया कि केवल प्राकृतिक वातावरण में निष्क्रिय बैठे रहने से भी शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को लाभ मिल सकता है। वहीं इस विषय पर हुए अन्य शोधों से पता चला है कि बाहर व्यायाम करने से मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा मिलता है जो आपको जिम या घर में उसी व्यायाम को करने से मिलता है। एक औसत अमरीकी किशोर डिजिटल स्क्रीन के सामने दिन में पांच से आठ घंटे बिताता है। यानि कि हमारे बच्चों से प्रकृति का साथ छूटता जा रहा है। इसलिए जरूरी है कि हम अपने बच्चों को खुली हवा में प्रकृति के साथ समय बिताने के लिए प्रेात्साहित करें। पहले जहां बच्चे स्थानीय पार्कों में खेलने, घर बनाने और पेड़ों पर चढऩे के बाहर घंटों बिताते थे वहीं आज इन क्रियाकलापों की जगह वीडियो गेम, टेलीविजन देखने और इन्डोर खेलों ने ले ली है। अब हमारे बच्चों का ग्रीन टाइम स्क्रीन टाइम से बदल गया है और इसका बच्चों के कल्याण और विकास पर प्रभाव पड़ा है।
प्रकृति के बीच रहने के ये होते फायदे
-प्रकृति में समय बिताने वाले बच्चों की स्कूल परफॉर्मेंस अच्छी होती है।
-ऐसे बच्चे ज्यादा क्रिएटिव और कल्पनाशील होते हैं।
-खेल-कूद में भी ऐसे बच्चों का प्रदर्शन बहुत शानदार होता है।
-टीम भावना, मिलकर काम करने की प्रवृत्ति, ज्यादा सामाजिकता और अपनत्व की भावना बढ़ती है। ऐसे बच्चे मानसिक परेशानियों से उबरने में भी सक्षम होते हैं।
-तनाव, चिंता, थकान, एकांकीपन और तेजी से मूड बदलने की आदत भी नहीं होती
-बच्चों में ध्यान लगाने और चीजों के बारे में बेसिक समझ में भी वृद्धि होती है।
-मजबूत हड्डियां, विटामिन डी की प्रचुरता, हृदय संबंधी बीमारियों सेे भी बच्चे सुरक्षित रहते हैं। आंखों की रोशनी बढ़ती है। नींद अच्छी आती है और ऐसे बच्चों का भविष्य में सफल होने की उम्मीद भी ज्यादा होती है।
-अच्छी और सेहतमंद जिंदगी के अलावा अपने बच्चों के साथ बाहर समय बिताने वाले माता-पिता के भी लंबे समय तक सेहतमंद बने रहने की आशा होती है।