स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि भारत में भी कोविड-19 वायरस से देश में हुई 73 फीसदी मौतें पहले से ही गंभीर रोगों से ग्रस्त (कोमोरबिड कंडीशन) लोगों की हुई है।
कोरोना वायरस (COVID-19 SARS-COV-02) के संक्रमण ने पूरी दुनिया को अपनी गिरफ्त में ले लिया है। दुनियाभर में संक्रमितों की संख्या 8,428,405 और संक्रमण से मरने वालों की संख्या 4,51,926 हो गई है। अब एक अध्ययन ने लोगों की नींदें उड़ा दी हैं। दरअसल इस अध्ययन में शोधकर्ताओं का दावा है कि पुरानी बीमारियों (जैसे मधुमेह, हृदय रोग इत्यादि या क्रॉनिकल डिजीज), संक्रमित होने से पहले ही बहुत बीमार रहे व्यक्ति और गंभीर रोगों से ग्रस्त (COMORBID CONDITION) लोगों को स्वस्थ्य व्यक्ति की तुलना में कोरोना से जान गंवाने का खतरा 12 गुनाा ज्यादा होता है। इतना ही नहीं गंभीर रोगों से ग्रस्त ऐसे व्यक्ति को संक्रमण के बाद गंभीर लक्षण उभरने और अस्पताल में भर्ती होने की संभावना भी छह गुना तक बढ़ जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के 15 जून को प्रकाशित एक रिपोर्ट में एक अध्ययन के हवाले से यह जानकारी सामने आई है। दुनियाभर में इस महामारी से संक्रमित और जान गंवाने वाले लोगों की हैल्थ रिपोर्ट की जांच करने के बाद डब्ल्यूएचओ के वैज्ञानिकों ने यह निष्कर्ष निकाला है। रिपोर्ट की गई थी।
सीडीसी ने किया था विश्लेषण
अमरीकी स्वास्थ्य एजेंसी सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन (CDC) की ओर से मरीजों की जांच करने के बाद हाल ही यह जानकारी डब्लूएचओ के साथ साझा की है। अध्ययन में 22 जनवरी से 30 मई के बीच अमरीका में संक्रमित पाए गए 13 लाख मामलों और करीब 1,03,700 मौतों का विश्लेषण किया गया। शेेध में सामने आया कि प्रत्येक पांच में से एक (19.5 फीसदी) गंभीर रूपसे पहले से ही बीमार संक्रमित करीब 1.6 फीसदी स्वस्थ लोगों की तुलना में कोरोना संक्रमण के कारण ज्यादा संख्या में मारे गए। विश्लेषण करने वाले चिकित्सकों ने बताया कि पुरानी बीमारियों से जूझ रहे लोगों के अस्पताल में भर्ती होने की संभावना भी स्वस्थ्य लोगों की तुलना में अधिक थी।
जो पहले से बीमार उन्हें खतरा ज्यादा
पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे 45.4 फीसदी लोग अस्पताल में भर्ती हुए, जबकि बिना किसी बीमारी से ग्रसित 7.6 फीसदी लोग ही संक्रमण के बाद अस्पताल में दाखिल करवाए गए। सीडीसी के अनुसार करीब 13 लाख संक्रमित लोगों में से 14 फीसदी मरीजों को अस्पताल में भर्ती करवाने की जरूरत पड़ी। जबकि इनमें से २ फीसदी वेंटिलेटर पर रखने की नौबत आ गई। विश्लेषण के अनुसार, गंभीर बीमारी और मृत्यु की संभावना उम्र के साथ बढ़ती है, विशेषकर पुरुषों और पहले से गंभीर रूप से बीमार लोगों में।