Premature Baby Care Tips: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार भारत में एक साल में लगभग 35 लाख से अधिक बच्चे प्रिमैच्योर पैदा होते हैं।जन्म के कुछ समय बाद जब बच्चे को अस्पताल से घर भेज दिया जाता है, तो मां के लिए अपने बच्चे की देखभाल सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है।
Premature Baby Care Tips: प्रेग्नेंसी के दौरान जब किसी शिशु का जन्म 37 हफ्तों से पहले हो जाता है, तो वह शिशु प्रिमैच्योर कहलाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार भारत में एक साल में लगभग 35 लाख से अधिक बच्चे प्रिमैच्योर पैदा होते हैं।जन्म के कुछ समय बाद जब बच्चे को अस्पताल से घर भेज दिया जाता है, तो मां के लिए अपने बच्चे की देखभाल सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है। कंगारू मदर केयर (KMC) प्रिमैच्योर बच्चे के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।आइए जानते हैं 3 ऐसे टिप्स जिनसे घर पर ही आप अपनी नन्हीं जान का बेहद हेल्दी तरीके से ख्याल रख सकती हैं।
कंगारू मदर केयर प्रिमैच्योर बच्चे की देखभाल की बेहद सरल और प्रभावी तकनीक है। परंतु इस तकनीक को किसी डॉक्टर की सलाह और निगरानी में करना ज्यादा सही रहता है। यह बच्चे को बिना कपड़ों के, केवल नैपी और टोपी पहनाकर मां की छाती से लगाकर रखने की तकनीक है। जैसे मादा कंगारू अपने बच्चे को थैली में रखती है। इससे बच्चे का शरीर गर्म रहता है और वजन बढ़ता है।कई अध्ययनों में देखा गया है कि KMC प्राप्त करने वाले बच्चों में मृत्यु दर का खतरा 30% तक कम होता है।
बच्चे का सिर एक ओर हल्का झुका हुआ हो और थोड़ा ऊपर की ओर होना चाहिए, ताकि बच्चे को सांस लेने में तकलीफ न हो। मां और बच्चे के बीच आंखों का संपर्क बना रहना चाहिए। बच्चे के सिर को ज्यादा आगे-पीछे मोड़ना नहीं चाहिए। बच्चे के पैर "मेंढक" जैसी मुद्रा में हों और हाथ भी हल्के मुड़े रहें। कंगारू मदर केयर के संपर्क की धीरे-धीरे शुरुआत करें और इसे नियमित रखें। कम से कम एक घंटे का सत्र करें, ताकि बीच में बार-बार बच्चे को असुविधा न हो। जब मां बच्चे के पास न हो, तो पिता, दादी या कोई करीबी भी कंगारू मदर केयर दे सकते हैं। यह प्रक्रिया तब तक जारी रख सकते हैं जब तक बच्चे का शारीरिक स्वास्थ्य ठीक न हो जाए। ध्यान रखे की यदि बच्चा लंबे समय तक सांस नहीं लेता या नीला पड़ने लगे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें, यह आपातकाल की स्थिति भी हो सकती है।
मां का दूध बच्चे के लिए अमृत साबित होता है, लेकिन प्रिमैच्योर बच्चों के लिए यही दूध जीवन रक्षक बन जाता है। इसलिए बच्चे को केवल मां का दूध ही पिलाएं और स्तनपान की (4S विधि) सीधा, समीप, सहारा, सामने का पालन करें। हर 2 घंटे में स्तनपान कराएं और तुरंत बाद बच्चे को डकार जरूर दिलाएं। फॉर्मूला मिल्क का इस्तेमाल केवल डॉक्टर की सलाह से करें, क्योंकि इससे संक्रमण का खतरा बढ़ता है।
प्रिमैच्योर बच्चों की इम्यूनिटी कमजोर होती है, इसलिए उनमें संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। ये निन्जा तकनीक अपनाकर संक्रमण को कहें बाय-बाय।