स्वास्थ्य

PresVu Eye Drops Ban : चश्मे की छुट्टी का दावा करने वाली PresVu आई ड्रॉप्स पर अचानक क्यों लगा बैन?

PresVu Eye Drops Ban : ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने PresVu आई ड्रॉप्स की मंजूरी को निलंबित कर दिया है, जिसने पढ़ने के चश्मे की जगह लेने के दावे के साथ काफी चर्चा बटोरी थी। दवा नियामक ने निर्माता एंटोड फार्मास्युटिकल्स को दिए गए विपणन और निर्माण लाइसेंस को रद्द कर दिया ।

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Sep 12, 2024
PresVu Eye Drops benned

PresVu Eye Drops Ban : हाल ही में ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने 'PresVu' आई ड्रॉप्स (PresVu Eye Drops) का लाइसेंस निलंबित कर दिया है। इस आई ड्रॉप्स को भारत की पहली ऐसी ड्रॉप्स के रूप में प्रचारित किया जा रहा था, जो पढ़ने के चश्मे की आवश्यकता को कम कर सकती है। आइए जानते हैं कि इस पर रोक क्यों लगाई गई और कंपनी की प्रतिक्रिया क्या है।

क्या दावा किया गया था? PresVu Eye Drops License Suspended: Were the Company’s Claims Misleading

सितंबर में, मुंबई स्थित एंटोड फार्मास्युटिकल्स ने दावा किया था कि 'PresVu' आई ड्रॉप्स प्रिस्बायोपिया से ग्रस्त लोगों के लिए चश्मे की आवश्यकता को कम कर सकती है। प्रिस्बायोपिया एक उम्र से संबंधित स्थिति है, जो आमतौर पर 40 वर्ष की उम्र के बाद पास की चीजों को देखने की क्षमता को कम कर देती है। कंपनी का कहना था कि 'PresVu' 40-55 वर्ष की उम्र के लोगों के लिए आदर्श है।

आई ड्रॉप्स के मुख्य घटक, पिलोकार्पिन, के कारण पुतलियों का आकार कम होता है, जिससे पास की चीजें देखना आसान हो जाता है। कंपनी ने दावा किया कि केवल एक ड्रॉप 15 मिनट के भीतर असर करना शुरू कर देती है और इसका प्रभाव 6 घंटे तक रहता है।

नियामक ने क्या कहा?

PresVu Eye Drops : डीसीजीआई ने एंटोड फार्मास्युटिकल्स के लाइसेंस को रद्द कर दिया, यह कहते हुए कि कंपनी ने "अनधिकृत प्रचार" किया और आई ड्रॉप्स के "असुरक्षित उपयोग" को लेकर चिंताएं जताई। नियामक के अनुसार, कंपनी द्वारा किए गए कुछ दावे अप्रमाणित और भ्रामक थे, जिनकी मंजूरी नहीं दी गई थी।

कंपनी के दावों पर आपत्ति:

कंपनी के तीन मुख्य दावों पर आपत्ति उठाई गई:

  1. पहला दावा: "भारत की पहली आई ड्रॉप्स जो पढ़ने के चश्मे की आवश्यकता को कम कर सकती है।"नियामक की प्रतिक्रिया: पिलोकार्पिन हाइड्रोक्लोराइड आई ड्रॉप्स के लिए ऐसा कोई दावा मंजूर नहीं किया गया है।
  2. दूसरा दावा: "यह आई ड्रॉप्स बिना चश्मे की आवश्यकता के पास की दृष्टि को बेहतर बनाने का गैर-आक्रामक विकल्प प्रदान करती है।"नियामक की प्रतिक्रिया: इसे प्रिस्बायोपिया के इलाज के लिए मंजूरी मिली है, लेकिन यह दावा नहीं कि यह चश्मे की आवश्यकता को समाप्त कर सकती है।
  3. तीसरा दावा: "प्रेस वू 15 मिनट में पास की दृष्टि को बढ़ावा देने का उन्नत विकल्प प्रदान कर सकती है।"नियामक की प्रतिक्रिया: ऐसा कोई दावा मंजूर नहीं किया गया है कि यह आई ड्रॉप्स 15 मिनट में प्रभावी होती है।

एंटोड फार्मास्युटिकल्स की प्रतिक्रिया:

PresVu Eye Drops : कंपनी ने डीसीजीआई के फैसले को अदालत में चुनौती देने का निर्णय लिया है। कंपनी के सीईओ निक्खिल के. मासुरकर का कहना है कि एंटोड ने मीडिया या जनता के सामने कोई गलत तथ्य प्रस्तुत नहीं किए हैं। कंपनी ने कहा कि उसने डीसीजीआई को नियंत्रित फेज 3 क्लिनिकल ट्रायल के सभी तथ्य उजागर किए थे, जिसमें आई ड्रॉप्स की प्रभावशीलता और सुरक्षा प्रमाणित हुई थी।

'PresVu' आई ड्रॉप्स के निलंबन (PresVu Eye Drops) का मुद्दा सिर्फ एक फार्मास्युटिकल कंपनी और नियामक के बीच की कानूनी लड़ाई नहीं है, बल्कि यह इस बात का संकेत है कि कैसे नई और अभिनव दवाओं के विकास और विपणन में पारदर्शिता और सुरक्षा मानकों का पालन करना आवश्यक है। इस विवाद ने देश में फार्मास्युटिकल नवाचार के भविष्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

आपको बता दें कि नई आंखों की ड्रॉप्स, जिसे PresVu के नाम से बाजार में उतारा जा रहा था और ये जल्द ही भारत में उपलब्ध होने वाली थी । यह ड्रॉप्स प्रेसीबायोपिया के इलाज के लिए उपयोगी बताई जा रही थी है और इसे पढ़ने के चश्मे की आवश्यकता को समाप्त करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। मुंबई स्थित एंटोड फार्मास्युटिकल्स द्वारा निर्मित इस ड्रॉप्स की कीमत 350 रुपये तय की गई थी और इस ड्रॉप्स को अक्टूबर से फार्मेसियों में उपलब्ध करवाने की बात की जा रहे थी. लेकिन अब बैन के बाद ये ड्रॉप्स कब तक आएगी इस बारे में अभी कोई जानकारी नहीं है ।

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