स्वास्थ्य

Bladder Cancer Study: ब्लैडर कैंसर की वापसी का खतरा 50% से ज्यादा घटा सकती है रेडिएशन थेरेपी, टाटा मेमोरियल स्टडी में दावा

Bladder Cancer Treatment: टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल की नई स्टडी में पाया गया है कि ब्लैडर कैंसर सर्जरी के बाद दी गई रेडिएशन थेरेपी कैंसर के दोबारा लौटने के जोखिम को 50% से ज्यादा कम कर सकती है। जानिए रिसर्च क्या कहती है।
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Updated: 5 Jun 2026, 11:34 AM IST
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रेडिएशन थेरेपी की प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo- freepik)

Bladder Cancer Recurrence: ब्लैडर कैंसर (मूत्राशय का कैंसर) उन कैंसरों में से एक है जिनका इलाज होने के बाद भी दोबारा लौटने का खतरा बना रहता है। लेकिन अब भारत से आई एक नई रिसर्च ऐसे मरीजों के लिए उम्मीद लेकर आई है। टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल (TMH) की अगुवाई में हुई एक स्टडी में पाया गया है कि सर्जरी के बाद दी जाने वाली रेडिएशन थेरेपी कैंसर के दोबारा लौटने के जोखिम को 50% से ज्यादा तक कम कर सकती है।

क्या कहती है नई स्टडी?

यह क्लीनिकल ट्रायल करीब 8 साल तक चला और देश के चार बड़े कैंसर केंद्रों में किया गया। स्टडी के नतीजे प्रतिष्ठित जर्नल ऑफ क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी (Journal of Clinical Oncology) में प्रकाशित हुए हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, ब्लैडर कैंसर के कुछ मरीजों में सर्जरी के बाद भी कैंसर दोबारा पेल्विस (श्रोणि क्षेत्र) में लौट सकता है। जब ऐसा होता है तो इलाज के विकल्प काफी सीमित हो जाते हैं और मरीज की जीवन प्रत्याशा पर भी असर पड़ सकता है।

ब्लैडर कैंसर क्यों है चुनौतीपूर्ण?

ब्लैडर कैंसर दुनिया में सबसे आम कैंसरों में शामिल है। भारत में भी हर साल हजारों नए मामले सामने आते हैं। यह बीमारी पुरुषों में ज्यादा देखी जाती है और तंबाकू का सेवन इसके सबसे बड़े जोखिम कारकों में से एक माना जाता है। मसल-इनवेसिव ब्लैडर कैंसर (Muscle-Invasive Bladder Cancer) इसका एक गंभीर रूप है, जिसमें कैंसर ब्लैडर की मांसपेशियों तक फैल जाता है। ऐसे मामलों में आमतौर पर कीमोथेरेपी के बाद ब्लैडर को सर्जरी के जरिए निकालना पड़ता है।

स्टडी में क्या पाया गया?

मूत्राशय सहायक रेडियोथेरेपी परीक्षण (BART) नाम के इस अध्ययन में 153 मरीजों को शामिल किया गया था। सभी मरीजों की ब्लैडर हटाने की सर्जरी हो चुकी थी। इनमें से आधे मरीजों को सर्जरी के बाद पेल्विस क्षेत्र में रेडिएशन थेरेपी दी गई, जबकि बाकी मरीजों को केवल निगरानी में रखा गया। रिसर्च में पाया गया कि जिन मरीजों को रेडिएशन दिया गया, उनमें कैंसर के दोबारा लौटने का खतरा 50% से अधिक कम हो गया। खास बात यह रही कि गंभीर साइड इफेक्ट्स बहुत कम मरीजों में देखने को मिले और ज्यादातर दुष्प्रभाव अस्थायी थे।

मरीजों के लिए क्यों है अहम?

ब्लैडर कैंसर का दोबारा लौटना मरीज और परिवार दोनों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। ऐसे में अगर सर्जरी के बाद रेडिएशन थेरेपी से इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सके, तो यह इलाज की रणनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
Updated on:
5 Jun 2026, 11:34 AM IST
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