
त्वचा पर दिखने वाले लैनुगो बाल कुपोषण और एनोरेक्सिया जैसी बीमारी का बड़ा संकेत हो सकते हैं।- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)
Lanugo Hair: अक्सर आपने देखा होगा कि जब कोई नया बच्चा (न्यू बॉर्न बेबी) पैदा होता है, तो उसके शरीर पर बहुत पतले और मुलायम बाल होते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर यही बाल किसी बड़े या वयस्क इंसान के चेहरे, पीठ, पेट या हाथों पर अचानक उगने लगें, तो यह कोई मामूली बात नहीं है? मेडिकल की भाषा में इन मुलायम और पतले बालों को लैनुगो (Lanugo) कहा जाता है।
क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के मुताबिक, बड़े होने पर शरीर पर लैनुगो बालों का अचानक आना गंभीर कुपोषण (Severe Malnutrition) या खाने से जुड़ी मानसिक बीमारी का बहुत बड़ा इशारा हो सकता है। आइए समझते हैं कि यह लैनुगो क्या होता है, शरीर पर क्यों आता है और इससे कैसे बचा जा सकता है।
एनसीबीआइ के अनुसार, लैनुगो बहुत ही पतले, बारीक, बिना किसी रंग (पिगमेंट) वाले और बेहद मुलायम बाल होते हैं। ये दिखने में बिल्कुल रुई या हल्के रोएं जैसे लगते हैं। आमतौर पर ये बाल मां के पेट में पल रहे बच्चे के शरीर पर बनते हैं। इनका काम गर्भ में बच्चे की नाजुक त्वचा की रक्षा करना और उसके शरीर को गर्म रखना होता है। आमतौर पर बच्चे के जन्म से पहले या जन्म के कुछ हफ्तों के भीतर ये बाल अपने आप झड़ जाते हैं। लेकिन अगर किसी बड़े इंसान के शरीर पर ये बाल फिर से अचानक उगने लगें, तो इसका मतलब है कि शरीर अंदर से बहुत ज्यादा कमजोर हो चुका है और उसे सही पोषण नहीं मिल पा रहा है।
जब किसी इंसान के शरीर को लंबे समय तक सही खाना, कैलोरी, प्रोटीन और न्यूट्रिशन नहीं मिलता, तो शरीर के अंदर जमा चर्बी (शरीर का फैट) पूरी तरह से खत्म होने लगती है। हमारा फैट ही हमारे शरीर को प्राकृतिक रूप से गर्म रखने का काम करता है। लेकिन जब शरीर में फैट बिल्कुल नहीं बचता, तो शरीर का तापमान तेजी से गिरने लगता है और इंसान को ठंड लगने लगती है। ऐसे में शरीर खुद का बचाव करने के लिए एक कुदरती कंबल तैयार करता है और त्वचा के ऊपर इन मुलायम बालों (Lanugo) को उगाने लगता है ताकि शरीर की बची-कुची गर्मी बाहर न भागे।
क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) की रिसर्च के अनुसार, लैनुगो का उगना मुख्य रूप से इन समस्याओं की वजह से होता है;
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Updated on:
23 Jul 2026 12:03 pm
Published on:
23 Jul 2026 12:03 pm
