
60 के बाद Gut Health का रखें खास ध्यान (photo- freepik)
Gut Brain Connection: 60 की उम्र पार करने के बाद शरीर में कई बदलाव आने लगते हैं। पहले जो खाना आसानी से पच जाता था, वही अब गैस, कब्ज, पेट फूलने या एसिडिटी की वजह बन सकता है। कई लोग इसे बढ़ती उम्र का सामान्य असर मान लेते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इस उम्र में गट हेल्थ (Gut Health) का खास ध्यान रखना जरूरी है। क्योंकि स्वस्थ आंतें सिर्फ पाचन ही नहीं, बल्कि इम्यूनिटी, मानसिक स्वास्थ्य और शरीर की ऊर्जा को भी प्रभावित करती हैं।
University of Kansas के प्रोफेसर डॉ. प्रवीण शर्मा ने बताया है कि हमारी आंत को अक्सर दूसरा दिमाग (Second Brain) कहा जाता है। वहीं National Institutes of Health (NIH) की रिसर्च भी बताती है कि आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया (Gut Microbiome) शरीर के कई जरूरी कामों में अहम भूमिका निभाते हैं।
बढ़ती उम्र के साथ भोजन को पचाने की क्षमता कम हो सकती है। इससे कब्ज, गैस और पेट भारी रहने जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। ऐसे में फाइबर युक्त भोजन और पर्याप्त पानी पाचन को बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं।
रिसर्च बताती है कि शरीर की बड़ी इम्यून गतिविधियां आंतों से जुड़ी होती हैं। अगर गट माइक्रोबायोम संतुलित रहे, तो संक्रमण का खतरा कम हो सकता है।
आज कई शोध Gut-Brain Axis की ओर इशारा करते हैं। यानी आंत और दिमाग लगातार एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं। खराब गट हेल्थ तनाव, बेचैनी और नींद की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है।
स्वस्थ आंतें विटामिन और मिनरल्स के अवशोषण (Absorption) में मदद करती हैं। 60 की उम्र में हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत रखने के लिए यह बेहद जरूरी है।
संतुलित गट हेल्थ सूजन (Inflammation) को नियंत्रित रखने में मदद कर सकती है, जो उम्र बढ़ने के साथ होने वाली कई स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ी मानी जाती है।
फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और दालें आंतों के अच्छे बैक्टीरिया को पोषण देती हैं और कब्ज से बचाने में मदद करती हैं।
उम्र बढ़ने के साथ प्यास कम महसूस हो सकती है। फिर भी शरीर को हाइड्रेट रखना पाचन और कब्ज से बचाव के लिए जरूरी है।
30-40 मिनट की वॉक या हल्का व्यायाम आंतों की गति बेहतर रखने और पाचन को सक्रिय बनाए रखने में मदद करता है।
बार-बार जंक फूड, मीठे पेय और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड खाने से गट माइक्रोबायोम का संतुलन बिगड़ सकता है।
अच्छी नींद और कम तनाव गट-ब्रेन कनेक्शन को बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं। योग, ध्यान और नियमित दिनचर्या इस उम्र में काफी फायदेमंद हो सकती है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Updated on:
06 Jul 2026 06:18 pm
Published on:
06 Jul 2026 06:18 pm
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