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जॉन्स हॉपकिंस मेडिसिन से जानें, Coronary Artery Bypass Graft Surgery क्या है? कब पड़ती है इसकी जरूरत

CABG Surgery: जानिए कोरोनरी आर्टरी बाईपास ग्राफ्ट सर्जरी (CABG) क्या है, यह कैसे की जाती है, किन मरीजों को इसकी जरूरत पड़ती है और रिकवरी कैसी होती है।
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भारत

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Dimple Yadav

Jul 06, 2026

CABG Surgery Bypass Surgery Heart Bypass Surgery

ब्लॉक हुई हृदय धमनी के लिए नया रक्त मार्ग बनाते हुए मेडिकल इलस्ट्रेशन (photo- freepik)

Coronary Artery Bypass Graft Surgery: जब डॉक्टर किसी मरीज से कहते हैं कि अब बायपास सर्जरी करवानी पड़ सकती है, तो ज्यादातर लोगों के मन में डर और कई सवाल पैदा हो जाते हैं। क्या दिल पूरी तरह खराब हो गया है? क्या दवाओं से इलाज संभव नहीं? क्या यह बहुत जोखिम भरी सर्जरी है? ऐसी चिंताएं स्वाभाविक हैं, लेकिन हर मरीज की स्थिति अलग होती है और बायपास सर्जरी का फैसला भी कई जांचों के बाद ही लिया जाता है।

Johns Hopkins Medicine के अनुसार, कोरोनरी आर्टरी बाईपास ग्राफ्ट सर्जरी (CABG) एक ऐसी सर्जरी है, जिसमें हृदय तक खून पहुंचाने वाली बंद या बहुत ज्यादा संकरी हो चुकी कोरोनरी धमनियों के लिए खून का नया रास्ता बनाया जाता है। इसका उद्देश्य हृदय की मांसपेशियों तक पर्याप्त ऑक्सीजन और रक्त पहुंचाना है, ताकि सीने के दर्द (एंजाइना) से राहत मिले और गंभीर हृदय संबंधी जटिलताओं का खतरा कम किया जा सके।

कोरोनरी आर्टरी बाईपास ग्राफ्ट सर्जरी (CABG) क्या होती है?

इस सर्जरी में शरीर के किसी दूसरे हिस्से, जैसे पैर, हाथ या छाती से एक स्वस्थ रक्त वाहिका (ब्लड वेसल) ली जाती है। फिर उसे हृदय की ब्लॉक हुई धमनी के ऊपर और नीचे जोड़कर खून के लिए नया रास्ता तैयार किया जाता है। इसी वजह से इसे बायपास सर्जरी कहा जाता है।

कब पड़ सकती है इसकी जरूरत?

हर ब्लॉकेज में बायपास सर्जरी जरूरी नहीं होती। Johns Hopkins Medicine के अनुसार, डॉक्टर निम्न स्थितियों में CABG पर विचार कर सकते हैं-

  • जब हृदय की एक से अधिक कोरोनरी धमनियों में गंभीर ब्लॉकेज हो।
  • अगर लेफ्ट मेन कोरोनरी आर्टरी में बड़ा अवरोध हो।
  • जब दवाओं और जीवनशैली में बदलाव के बाद भी बार-बार सीने में दर्द बना रहे।
  • यदि एंजियोप्लास्टी या स्टेंट से पर्याप्त लाभ मिलने की संभावना कम हो।
  • कुछ मामलों में हार्ट अटैक के बाद भी मरीज की स्थिति के अनुसार बायपास सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।

सर्जरी से पहले कौन-कौन सी जांच होती हैं?

सर्जरी का निर्णय लेने से पहले डॉक्टर मरीज की पूरी स्वास्थ्य स्थिति का आकलन करते हैं। इसके लिए ईसीजी (ECG), इकोकार्डियोग्राफी, कोरोनरी एंजियोग्राफी, ब्लड टेस्ट और अन्य जरूरी जांच की जा सकती हैं। इन रिपोर्टों के आधार पर तय किया जाता है कि CABG सबसे उपयुक्त विकल्प है या नहीं।

रिकवरी में कितना समय लग सकता है?

सर्जरी के बाद कुछ दिन अस्पताल में निगरानी रखी जाती है। घर लौटने के बाद भी पूरी तरह सामान्य दिनचर्या में आने में कई सप्ताह लग सकते हैं। इस दौरान डॉक्टर की दवाएं समय पर लेना, हल्की शारीरिक गतिविधि, संतुलित आहार और नियमित फॉलो-अप बेहद जरूरी होते हैं। रिकवरी की अवधि हर व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य और सर्जरी की जटिलता के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

रिसर्च क्या कहती है?

Johns Hopkins Medicine के अनुसार, कोरोनरी आर्टरी बाईपास ग्राफ्ट सर्जरी (CABG) उन मरीजों के लिए प्रभावी उपचार विकल्प हो सकती है, जिनकी कोरोनरी धमनियों में गंभीर ब्लॉकेज है और जिन्हें केवल दवाओं या अन्य प्रक्रियाओं से पर्याप्त लाभ मिलने की संभावना नहीं है। सही समय पर की गई सर्जरी से कई मरीजों में लक्षणों में सुधार, जीवन की गुणवत्ता में वृद्धि और हृदय संबंधी जटिलताओं के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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