Rasgulla Paralysis Warning Doctor: क्या ज्यादा रसगुल्ले खाना जानलेवा हो सकता है? जानें 'हाइपोकैलेमिक पीरियोडिक पैरालिसिस' के बारे में, जिसने मिठाई के शौकीनों की नींद उड़ा दी है।
Rasgulla Paralysis Warning Doctor: भारत में मिठाई के शौकीनों की कमी नहीं है, और रसगुल्ला तो हर उत्सव की शान होता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपकी पसंदीदा मिठाई आपको अस्पताल के बेड तक पहुंचा सकती है, वह भी लकवा (Paralysis) के लक्षणों के साथ? हाल ही में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है जहां एक स्वस्थ युवक को भारी मात्रा में रसगुल्ले खाने के कुछ ही घंटों बाद शरीर के निचले हिस्से में लकवा मार गया। डॉक्टरों ने इस घटना के पीछे एक ऐसी दुर्लभ बीमारी का खुलासा किया है जिसे जानकर आप भी दंग रह जाएंगे।
टाइम्स नाउ की रिपोर्ट और मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार, इस स्थिति को 'हाइपोकैलेमिक पीरियोडिक पैरालिसिस' (Hypokalemic Periodic Paralysis) कहा जाता है। यह एक ऐसी दुर्लभ मेडिकल कंडीशन है जिसमें शरीर की मांसपेशियों को काम करने के लिए पर्याप्त पोटेशियम (Potassium) नहीं मिल पाता, जिसके परिणामस्वरूप व्यक्ति अचानक हिलने-डुलने में असमर्थ हो जाता है।
जब हम भारी मात्रा में चीनी या कार्बोहाइड्रेट (जैसे रसगुल्ला) का सेवन करते हैं, तो हमारे शरीर में इंसुलिन (Insulin) का स्तर अचानक बढ़ जाता है। इंसुलिन का मुख्य काम ग्लूकोज को नियंत्रित करना है, लेकिन इस प्रक्रिया में वह रक्त से पोटेशियम को खींचकर मांसपेशियों की कोशिकाओं के अंदर धकेल देता है।
जिन लोगों में यह जेनेटिक समस्या होती है, उनके रक्त में पोटेशियम का स्तर अचानक गिर जाता है। मांसपेशियों को संकेत भेजने के लिए पोटेशियम अनिवार्य है। इसकी कमी होते ही मांसपेशियां 'शटडाउन' मोड में चली जाती हैं, जिससे व्यक्ति को पैरालिसिस का अनुभव होता है।
इस मामले पर देश के प्रमुख न्यूरोलॉजिस्ट और विशेषज्ञों ने गंभीर चेतावनी दी है। वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. सुधीर कुमार ने कहा कि "हाइपोकैलेमिक पैरालिसिस अक्सर उन युवाओं में देखा जाता है जो अचानक बहुत अधिक मीठा या कार्बोहाइड्रेट युक्त भोजन करते हैं। यह स्थिति जानलेवा हो सकती है यदि यह श्वसन मांसपेशियों (Respiratory muscles) को प्रभावित कर दे। युवाओं को समझना चाहिए कि किसी भी चीज की अति, विशेषकर मीठे की, उनके शरीर के इलेक्ट्रोलाइट संतुलन को बिगाड़ सकती है।"
रिसर्च बताती है कि यह समस्या अक्सर 20 से 40 वर्ष की आयु के पुरुषों में अधिक देखी जाती है। इसके मुख्य ट्रिगर्स में अचानक बहुत अधिक मीठा या जंक फूड खाना। भारी कसरत (Strenuous exercise) के बाद तुरंत भारी भोजन करना। स्ट्रेस और शराब का अत्यधिक सेवन करना शामिल है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मीठा खाने के बाद आपको हाथ-पैरों में भारीपन या कमजोरी महसूस हो, तो इसे 'थकान' समझकर नजरअंदाज न करें। यह 'क्षणिक' लकवा हो सकता है। ऐसे समय में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और अपना पोटेशियम लेवल चेक कराएं।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।