स्वास्थ्य

त्वचा पर लगे रंग को निकालने के लिए नाखूनों से खुरचेंगे तो हो जाएगा अल्सर

होली के रंग में इस्तेमाल होने वाला केमिकल त्वचा के साथ उन लोगों को भी नुकसान पहुंचा सकता है जिन्होंने हाल ही ऑपरेशन या हेयर ट्रांसप्लांट कराया है।
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Feb 27, 2018
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होलीरंगों और खुशी का त्योहार है लेकिन केमिकल युक्त रंगों का अधिक इस्तेमाल इस खुशी के रंग में भंग डालने का काम करते हैं। केमिकल युक्त रंगों में क्रोमियम, सिल्वर और लेड का इस्तेमाल होता है। जब ये केमिकल रंगों के साथ शरीर, चेहरे और बाल में जाते हैं तो त्वचा में रिएक्शन होता है जिससे स्किन इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है। कुछ लोग इन रंगों को छुड़ाने के लिए नाखून या हार्ड ब्रश से खुरचने लगते हैं जिससे त्वचा पर अल्सर (छोटे घाव) होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में होली खेलने के साथ रंगों को लेकर सावधानी बरती जाए तो परेशानी से बचा जा सकता है।

त्वचा को हो सकता है टेंपरेरी नुकसान

होली के रंग त्वचा को टेंपरेरी नुकसान पहुंचाते हैं। क्रोमियम, सिल्वर और लेड से बने रंग जब त्वचा पर लगता है तो त्वचा के भीतर मौजूद रंग बनाने वाली कोशिकाओं का काम प्रभावित होता है। इससे त्वचा पर दाग, धब्बे के साथ उसमें कालापन बन सकता है। रंग को छुड़ाने के लिए कभी भी ब्रश या हार्ड स्क्रब का प्रयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि रंग निकालने के चक्कर में त्वचा की उपरी सतह खराब हो जाती है।

एलर्जी डर्मिटाइटिस के मामले अधिक

केमिकल युक्त रंगों से सबसे अधिक परेशानी एलर्जी डर्मिटाइटिस की समस्या देखने को मिलती है। इसमें त्वचा पर लाल चकत्ते, खुजली के साथ छोटे-छोटे दाने होने लगते हैं। ऐसे में बिना देर किए डॉक्टर से मिलना चाहिए ताकि बड़ी परेशानी से बचा जा सके।

हेयर ट्रांसप्लांट के रोगी न खेले रंग

जिन लोगों ने डेढ़ दो महीने पहले हेयर ट्रांसप्लांट कराया है उन्हें रंग खेलने से बचना चाहिए। स्कैल्प (खोपड़ी) पर रंग जमने की वजह से संक्रमण फैल सकता है और ट्रांसप्लांट फेल होने का खतरा अधिक रहता है। कलर से दूर रहें तो ज्यादा फायदा होगा। इसी तरह किसी में स्किन ग्राफ्टिंग हुई है तो उस हिस्से में रंग लगने से ग्राफ्टिंग खराब हो सकती है। इसी तरह जिन लोगों का ऑपरेशन हुआ है वो सावधानी बरतें क्योंकि टांके पर केमिकल युक्त रंग लगने से त्वचा को नुकसान हो सकता है।

डॉ. दीपेश गोयल, स्कीन एंड कॉस्मेटिक सर्जन

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
Published on:
27 Feb 2018 05:22 pm