
लाल रक्त कोशिकाएं बड़ी होने पर क्या होता है- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)
Macrocytosis Symptoms: शरीर को दुरुस्त रखने और हर हिस्से तक ऑक्सीजन पहुंचाने में खून का बहुत बड़ा योगदान होता है। हमारे खून में मौजूद लाल रक्त कोशिकाएं (Red Blood Cells - RBCs) शरीर के अलग-अलग अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करती हैं। आमतौर पर इन कोशिकाओं का एक खास आकार और साइज होता है। लेकिन कभी-कभी ये रेड ब्लड सेल्स अपने सामान्य साइज से काफी बड़ी हो जाती हैं। डॉक्टरी भाषा में इसी स्थिति को मैक्रोसाइटोसिस (Macrocytosis) कहा जाता है। मेयो क्लिनिक (Mayo Clinic) के अनुसार, मैक्रोसाइटोसिस खुद में कोई बीमारी नहीं है, बल्कि यह शरीर में पल रही किसी दूसरी अंदरूनी समस्या या पोषण की कमी का एक बड़ा इशारा होता है। आइए समझते हैं कि मैक्रोसाइटोसिस क्या है, इसके पीछे क्या वजहें होती हैं और शरीर में इसके क्या लक्षण दिखाई देते हैं।
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, हमारे शरीर की अस्थि मज्जा (Bone Marrow) में नई लाल रक्त कोशिकाएं बनती रहती हैं। जब खून की जांच (CBC Test) कराई जाती है, तो उसमें कोशिकाओं का औसत आकार नापा जाता है, जिसे MCV (Mean Corpuscular Volume) कहते हैं। अगर रिपोर्ट में MCV का स्तर सामान्य से ज्यादा आता है, तो इसका मतलब है कि आपकी रेड ब्लड सेल्स का साइज जरूरत से ज्यादा बड़ा हो गया है। जब ये कोशिकाएं बहुत बड़ी हो जाती हैं, तो ये शरीर में सही तरीके से काम नहीं कर पातीं। कई बार इसके साथ खून की कमी यानी मैक्रोसाइटिक एनीमिया (Macrocytic Anemia) भी हो जाता है।
लाल रक्त कोशिकाओं का आकार बड़ा होने के पीछे कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं। इनमें से सबसे प्रमुख वजहें ये हैं;
शरीर को सही आकार और संख्या में लाल रक्त कोशिकाएं बनाने के लिए विटामिन B12 और फोलेट की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। जब शरीर में इन दोनों विटामिन्स की कमी हो जाती है, तो अस्थि मज्जा सही साइज की कोशिकाएं नहीं बना पाता और असामान्य रूप से बड़ी कोशिकाएं बनने लगती हैं।
बहुत ज्यादा शराब पीने से भी खून की कोशिकाओं के बनने की प्रक्रिया पर बुरा असर पड़ता है। शराब सीधे तौर पर बोन मैरो को प्रभावित करती है, जिससे रेड ब्लड सेल्स का आकार बड़ा होने लगता है।
लिवर हमारे शरीर में फैट और प्रोटीन्स को संतुलित रखने का काम करता है। जब लिवर में कोई बीमारी या खराबी आ जाती है, तो लाल रक्त कोशिकाओं की बाहरी परत पर अतिरिक्त फैट जमने लगता है, जिससे उनका साइज बड़ा दिखने लगता है।
जब थायराइड ग्रंथि धीमी गति से काम करने लगती है (हाइपोथायरायडिज्म), तो शरीर का मेटाबॉलिज्म सुस्त पड़ जाता है। इसका असर खून की कोशिकाओं के बनने पर भी पड़ता है।
कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं (कीमोथेरेपी), मिर्गी की दवाएं या इम्यून सिस्टम को दबाने वाली दवाइयों के साइड इफेक्ट के रूप में भी मैक्रोसाइटोसिस हो सकता है।
डॉक्टर सबसे पहले एक साधारण CBC (Complete Blood Count) टेस्ट करवाते हैं। इसमें अगर MCV का लेवल बढ़ा हुआ निकलता है, तो इसके असली कारण को जानने के लिए विटामिन B12, फोलेट, थायराइड और लिवर फंक्शन टेस्ट कराए जाते हैं। मैक्रोसाइटोसिस किसी दूसरी वजह से होता है, इसलिए इलाज भी उसी कारण पर निर्भर करता है, अगर विटामिन B12 या फोलेट की कमी है, तो डॉक्टर विटामिन्स की गोलियां, सप्लीमेंट्स या इंजेक्शन देते हैं।अगर वजह शराब का सेवन है, तो शराब पूरी तरह से छोड़ने की सलाह दी जाती है। अगर यह किसी दवा का साइड इफेक्ट है, तो डॉक्टर दवा बदल सकते हैं।
अगर आपको बिना किसी वजह के लंबे समय से थकान, सुस्ती, हाथ-पैरों में झुनझुनी या चक्कर आने की समस्या बनी हुई है, तो इसे नजरअंदाज न करें। तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें और ब्लड टेस्ट करवाएं। समय पर सही कारण का पता लगाकर और सही डाइट या सप्लीमेंट्स लेकर इसे बहुत आसानी से ठीक किया जा सकता है।
Published on:
14 Sept 2026 03:40 pm
