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पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन कम होने पर दिख सकते हैं ये लक्षण, जानें Mayo Clinic से Male Hypogonadism के संकेत

Male Hypogonadism Cause: पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन कम होने पर थकान, चिड़चिड़ापन जैसे कई संकेत दिखते हैं। मेयो क्लिनिक और क्लीवलैंड क्लिनिक से जानिए Male Hypogonadism के लक्षण और कारण।
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भारत

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Nidhi Yadav

Sep 14, 2026

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पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन कम किस कारण से होता है- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)

Male Hypogonadism Symptoms: पुरुषों के शरीर को तंदुरुस्त, ऊर्जावान रखने में टेस्टोस्टेरोन (Testosterone) नाम के हार्मोन का सबसे बड़ा हाथ होता है। इसे पुरुषों का मुख्य सेक्स हार्मोन भी कहा जाता है। जब शरीर में इस हार्मोन का स्तर सामान्य से कम हो जाता है, तो इस स्थिति को मेडिकल भाषा में मेल हाइपोगोनेडिज्म (Male Hypogonadism) या लो-टी (Low-T) कहा जाता है। मेयो क्लिनिक (Mayo Clinic) के मुताबिक, टेस्टोस्टेरोन कम होने का असर इंसान के मूड, ऊर्जा, हड्डियों और मांसपेशियों की ताकत को भी बुरी तरह प्रभावित करता है। आइए समझते हैं कि टेस्टोस्टेरोन कम होने पर शरीर क्या-क्या संकेत देता है और इसका सेहत पर क्या असर पड़ता है।

मेल हाइपोगोनेडिज्म (लो-टेस्टोस्टेरोन) आखिर क्या है?

क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, टेस्टोस्टेरोन हार्मोन पुरुषों के अंडकोष (Testicles) में बनता है। यह हार्मोन पुरुषों में दाढ़ी-मूंछ आने, आवाज भारी होने, मांसपेशियों की मजबूती, हड्डियों के घनत्व (density) और स्पर्म (शुक्राणु) बनने के लिए जिम्मेदार होता है। जब अंडकोष या दिमाग का वह हिस्सा जो टेस्टोस्टेरोन बनाने का सिग्नल देता है (पिट्यूटरी ग्लैंड), सही से काम नहीं करता, तो शरीर में इस हार्मोन की कमी होने लगती है। इसी कमी को हाइपोगोनेडिज्म कहते हैं। उम्र बढ़ने के साथ टेस्टोस्टेरोन का थोड़ा कम होना स्वाभाविक है, लेकिन अगर यह बहुत तेजी से गिरता है तो शरीर में कई तरह के बदलाव दिखने लगते हैं।

पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन कम होने के मुख्य लक्षण

जब शरीर में टेस्टोस्टेरोन का लेवल गिरता है, तो इसके लक्षण अलग-अलग तरीकों से सामने आते हैं। इन लक्षणों को हम मुख्य रूप से तीन हिस्सों में समझ सकते हैं;

  • हर वक्त थकान और सुस्ती महसूस होना।
  • मांसपेशियां कमजोर होना।
  • शरीर और पेट पर चर्बी बढ़ना।
  • हड्डियां कमजोर होना।
  • शरीर और चेहरे के बाल कम होना।
  • स्पर्म काउंट कम होना।
  • मूड में चिड़चिड़ापन और उदासी होना।
  • फोकस करने में दिक्कत आना।
  • नींद की समस्या होना (स्लीप एप्निया)।

टेस्टोस्टेरोन कम होने के पीछे क्या कारण हैं?

डॉक्टरों के अनुसार मेल हाइपोगोनेडिज्म के कारण दो तरह के हो सकते हैं;

  • प्राइमरी हाइपोगोनेडिज्म- जब समस्या सीधे अंडकोष में होती है। ऐसा किसी चोट, इन्फेक्शन, कैंसर के इलाज (कीमोथेरेपी) या जन्मजात कारणों से हो सकता है।
  • सेकेंडरी हाइपोगोनेडिज्म- जब समस्या दिमाग के पिट्यूटरी ग्लैंड में होती है, जो अंडकोष को टेस्टोस्टेरोन बनाने का मैसेज भेजता है। अत्यधिक तनाव, मोटापा, डायबिटीज, या कुछ दवाइयां इसका कारण बन सकती हैं। इसके अलावा बहुत ज्यादा शराब पीना, धूम्रपान करना, खराब लाइफस्टाइल और बहुत अधिक वजन होना भी टेस्टोस्टेरोन का लेवल तेजी से गिरा सकता है।

इसकी जांच और सही इलाज क्या है?

अगर आपको ऊपर दिए गए लक्षण लंबे समय से महसूस हो रहे हैं, तो इसे छुपाने या नजरअंदाज करने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। डॉक्टर एक साधारण ब्लड टेस्ट (Serum Testosterone Test) के जरिए खून में टेस्टोस्टेरोन के स्तर की जांच करते हैं। यह टेस्ट अक्सर सुबह के समय किया जाता है क्योंकि सुबह टेस्टोस्टेरोन का लेवल सबसे ज्यादा होता है। अगर रिपोर्ट में हार्मोन कम आता है, तो डॉक्टर टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (TRT) की सलाह दे सकते हैं। यह थेरेपी जेल, पैच, इंजेक्शन या गोलियों के रूप में दी जाती है। संतुलित आहार लेना, नियमित रूप से वजन उठाना (वेट ट्रेनिंग), तनाव कम करना, 7-8 घंटे की अच्छी नींद लेना और वजन को काबू में रखना टेस्टोस्टेरोन के स्तर को प्राकृतिक रूप से सुधारने में बहुत मदद करता है।

डॉक्टर से परामर्श कब लें?

यदि आपको हर वक्त थकान रहती है, इच्छा में कमी आ रही है या मूड बहुत ज्यादा बदल रहा है, तो खुद से कोई भी सप्लीमेंट या दवाई लेने की गलती न करें। तुरंत किसी योग्य डॉक्टर (एंडोक्रोलॉजिस्ट या यूरोलॉजिस्ट) से मिलें। सही जांच और डॉक्टरी सलाह से इस समस्या का आसानी से समाधान किया जा सकता है।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।