
महिलाओं और पुरुषों में बढ़ा मोटापा प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo- Chatgtp)
Obesity Crisis in India: भारत में इस वक्त एक ऐसी बीमारी पैर पसार रही है, जो बिना किसी शोर-शराबे के हमारे घरों और थालियों में दाखिल हो चुकी है। यह मुसीबत है, मोटापा (Obesity)। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने हाल ही में नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-6 (NFHS-6) के आंकड़े जारी किए हैं। ये सिर्फ नंबर्स नहीं हैं, बल्कि हमारी बिगड़ती सेहत का एक बड़ा अलार्म हैं।
इस सर्वे के अनुसार, देश में 15 से 49 साल के युवाओं और कामकाजी लोगों में वजन बढ़ने की समस्या खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है। पिछले 5 सालों में महिलाओं में मोटापे की दर 24% से सीधे छलांग लगाकर 30.70% (यानी करीब 6.7% की भारी वृद्धि) पर पहुंच गई है। वहीं, पुरुषों का आंकड़ा भी पीछे नहीं है, यह 22.90% से बढ़कर 27.30% हो गया है।
अगर हम इन आंकड़ों को थोड़ा और आसान भाषा में समझें, तो सबसे ज्यादा डराने वाली स्थिति हमारे शहरों की है। शहरों में रहने वाली 42.8% महिलाएं और 36.3% पुरुष आज मोटापे या ओवरवेट की कैटगरी में आ चुके हैं। सीधे शब्दों में कहें तो मेट्रो शहरों में रहने वाला लगभग हर दूसरा इंसान अपनी उम्र और लंबाई के हिसाब से बहुत ज्यादा वजन लेकर जी रहा है।
चिंता की बात यह है कि अब ग्रामीण भारत (गांव) भी इसकी चपेट में आ रहा है, जहां 25.5% महिलाएं और 23% पुरुष इसका शिकार हो चुके हैं। इसकी वजह बहुत साफ है बाजार में मिलने वाला पैकेज्ड फूड, हद से ज्यादा चीनी का इस्तेमाल और फिजिकल एक्टिविटी का न होना। इन चीजों ने गांवों की पुरानी और एक्टिव लाइफस्टाइल को पूरी तरह से बदल दिया है।
दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल द लैंसेट (The Lancet) और ग्लोबल हेल्थ रिसर्च के मुताबिक, मोटापा सिर्फ शरीर पर चर्बी चढ़ना नहीं है। यह असल में हमारे अंदरूनी अंगों के काम करने के तरीके को ब्लॉक कर देता है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि बढ़ता वजन पुरुषों और महिलाओं के शरीर पर अलग-अलग तरीके से हमला करता है।
महिलाओं का हॉर्मोनल सिस्टम फैट (वसा) को लेकर बहुत नाजुक होता है। मेडिकल रिसर्च कहती है कि वजन बढ़ने पर महिलाओं को ये दिक्कतें सबसे ज्यादा घेरती हैं:
PCOS/PCOD और बांझपन (Infertility): शरीर में जब ज्यादा फैट जमा होता है, तो एस्ट्रोजन नाम के जरूरी हॉर्मोन का बैलेंस बिगड़ जाता है। इससे पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं और महिलाओं को मां बनने में गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
कैंसर का खतरा:कैंसर रिसर्च यूके की एक रिपोर्ट चौंकानी वाली है। इसके मुताबिक, जिन महिलाओं का वजन ज्यादा होता है, उनमें मेनोपॉज (पीरियड्स बंद होने) के बाद ब्रेस्ट कैंसर और बच्चेदानी का कैंसर (एंडोमेट्रियल कैंसर) होने का चांस आम महिलाओं के मुकाबले 40% तक ज्यादा बढ़ जाता है।
प्रेगनेंसी में मुश्किलें: ओवरवेट महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान जेस्टेशनल डायबिटीज (गर्भावस्था की शुगर) और हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत हो जाती है, जिसका सीधा और बुरा असर गर्भ में पल रहे बच्चे की सेहत पर पड़ता है।
पुरुषों के शरीर में फैट ज्यादातर पेट के निचले हिस्से और अंदरूनी अंगों के आसपास जमा होता है, जिसे मेडिकल भाषा में विसरल फैट कहते हैं। यह सीधे उनके मेटाबॉलिज्म को तबाह करता है:
कमजोरी (इरेक्टाइल डिस्फंक्शन) और लो-टेस्टोस्टेरोन:ब्रिटिश मेडिकल जर्नल (BMJ) की रिसर्च बताती है कि मोटापा पुरुषों के मुख्य सेक्स हॉर्मोन टेस्टोस्टेरोन को तेजी से घटा देता है। पेट की ज्यादा चर्बी नसों में खून के बहाव को रोकती है, जिससे शादीशुदा जिंदगी में परेशानियां आने लगती हैं।
स्लीप एपेनिया (रात में सांस रुकना): पुरुषों का वजन जब बढ़ता है, तो गले के आसपास भी फैट जमा होने लगता है। इसकी वजह से सोते समय सांस की नली दब जाती है। रात में बार-बार सांस रुकती है, बहुत तेज खर्राटे आते हैं और दिनभर थकान बनी रहती है। यह स्थिति कई बार अचानक हार्ट अटैक की वजह भी बन जाती है।
फैटी लिवर और किडनी की बीमारी: पेट की चर्बी के कारण लिवर के चारों तरफ फैट की परत बन जाती है, जिसे नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर कहते हैं। अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो यह लिवर को हमेशा के लिए डैमेज (लिवर सिरोसिस) कर देता है और आगे चलकर किडनी फेलियर का रास्ता खोलता है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Published on:
30 May 2026 11:35 am
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