29 मई 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Social Jet Lag Side Effects: पूरे हफ्ते की थकान मिटाने के लिए रविवार को देर तक सोना सही है या गलत? न्यूरोलॉजिस्ट से समझें सोशल जेट लैग

Sleep Pattern and Brain Health: क्या आप भी पूरे हफ्ते की स्लीप रिकवरी के लिए संडे को देर तक सोते हैं? न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. शुभम गुप्ता से जानिए सोशल जेट लैग का विज्ञान और इसके गंभीर नुकसान।

2 min read
Google source verification

भारत

image

Dimple Yadav

May 29, 2026

Social Jet Lag Side Effects

देर तक सोने की प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo- chatgtp)

Sunday Oversleeping Side Effects: सोमवार से शनिवार तक ऑफिस की भागदौड़, काम का स्ट्रेस और सुबह जल्दी उठने के चक्कर में अक्सर हमारी नींद पूरी नहीं हो पाती। ऐसे में पूरे हफ्ते की स्लीप रिकवरी करने के लिए हम सब रविवार (संडे) का बेसब्री से इंतजार करते हैं और इस दिन बिना अलार्म लगाए दोपहर तक सोते हैं। उस वक्त तो लगता है कि थकान मिट गई, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह आदत आपके दिमाग और पूरे स्लीप पैटर्न को बुरी तरह डैमेज कर रही है?

न्यूरोलॉजी की भाषा में इसे सोशल जेट लैग (Social Jet Lag) कहा जाता है। आइए न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. शुभम गुप्ता से समझते हैं कि वीकेंड पर देर तक सोने का यह खेल हमारे दिमाग के लिए कितना खतरनाक है।

क्या है सोशल जेट लैग?

मारे दिमाग के अंदर एक मास्टर क्लॉक होती है, जिसे सर्केडियन रिदम (Circadian Rhythm) या बायोलॉजिकल क्लॉक कहते हैं। यह क्लॉक हमारे सोने, जागने और हॉर्मोन्स रिलीज करने के समय को नियंत्रित करती है। जब आप रोज सुबह एक निश्चित समय (जैसे 6 या 7 बजे) उठते हैं, तो आपका दिमाग उसी समय एक्टिव होने के लिए प्रोग्राम हो जाता है। लेकिन रविवार को जब आप सुबह 11 या 12 बजे तक सोते हैं, तो आपकी इंटरनल क्लॉक और आपके असल सोशल टाइम के बीच एक बड़ा मिसमैच (अंतर) पैदा हो जाता है।

डॉ. गुप्ता के मुताबिक सिर्फ वीकेंड पर अपने सोने-जागने का समय बदलने से जो आपके दिमाग को झटका लगता है, उसे ही सोशल जेट लैग कहते हैं। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे आप अचानक किसी दूसरे देश चले गए हों और आपका दिमाग टाइम जोन एडजस्ट न कर पा रहा हो।

देर तक सोने के साइड इफेक्ट्स

संडे को देर से उठने के कारण रात को समय पर नींद नहीं आती। नतीजा यह होता है कि मंडे की सुबह जब आप दोबारा जल्दी उठते हैं, तो दिमाग पूरी तरह थका होता है। इसी वजह से मंडे को सिरदर्द, भारीपन और चिड़चिड़ापन सबसे ज्यादा होता है। वीकेंड पर नींद का रूटीन बदलने से दिमाग में मेलाटोनिन (Melatonin - नींद लाने वाला हॉर्मोन) का बैलेंस बिगड़ जाता है।

इससे गहरी नींद (Deep Sleep) का समय कम हो जाता है, जिससे याददाश्त प्रभावित होती है और दिनभर दिमाग सुस्त (Brain Fog) रहता है। सोशल जेट लैग सिर्फ दिमाग नहीं, पूरे मेटाबॉलिज्म को डिस्टर्ब करता है। रिसर्च बताती हैं कि स्लीप रूटीन में बार-बार आने वाले इस बदलाव से इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है, जिससे डायबिटीज, मोटापा और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

बचाव के लिए जरूरी सलाह

वीकेंड हो या वर्किंग डे, अपने सोने और जागने के समय में 1 घंटे से ज्यादा का अंतर न आने दें। अगर आप रोज 7 बजे उठते हैं, तो संडे को ज्यादा से ज्यादा 8 बजे तक उठ जाएं। इसके साथ ही सुबह देर तक सोकर बायोलॉजिकल क्लॉक बिगाड़ने के बजाय आप दोपहर में 20 से 30 मिनट का एक छोटा पावर नैप ले सकते हैं। यह आपके दिमाग को रीचार्ज कर देगा। शनिवार की रात को देर तक वेब सीरीज देखने या फोन चलाने से बचें। फोन की ब्लू लाइट दिमाग को भ्रमित करती है और सोशल जेट लैग के असर को दोगुना कर देती है।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

बड़ी खबरें

View All

स्वास्थ्य

ट्रेंडिंग

लाइफस्टाइल