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Plastic Bottle Liquor: प्लास्टिक बोतल में शराब से हार्मोनल असंतुलन की आशंका, रिसर्च में हुआ खुलासा

Plastic Bottle Liquor: प्रदेश सरकार ने प्लास्टिक की बोतलों में शराब बेचने का निर्णय लिया है। शराब दुकानों में प्लास्टिक की बाेतल वाली शराब बिकनी भी शुरू हो चुकी है।

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Plastic Bottle Liquor: प्लास्टिक बोतल में शराब से हार्मोनल असंतुलन की आशंका, रिसर्च में हुआ खुलासा

प्लास्टिक बोतल में शराब (Photo AI)

Plastic Bottle Liquor: प्लास्टिक की बोतलों में बिकने वाली शराब से स्वास्थ्य को काफी नुकसान हो सकता है। डॉक्टरों के अनुसार अधिक अल्कोहल की मात्रा वाली शराब से फ्थेलेट्स व बिसफेनॉल ए केमिकल रिलीज होगा, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इससे हार्मोनल असंतुलन हो सकता है। यही नहीं शौकीनों के लिए शराब का स्वाद भी बदल सकता है। डॉक्टरों के अनुसार कम समय के स्टोरेज के लिए प्लास्टिक की बोतल एक विकल्प हो सकता है, लेकिन लंबे समय के लिए यह सेहत को नुकसान पहुंचाने वाला है।

कांच की बोतल न केवल शराब की गुणवत्ता बनाए रखती है, बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी अधिक सुरक्षित है। प्लास्टिक बोतलें केवल सुविधा के लिए हैं, लेकिन लंबे समय तक उपयोग के लिए उपयुक्त नहीं मानी जातीं। प्रदेश सरकार ने प्लास्टिक की बोतलों में शराब बेचने का निर्णय लिया है। शराब दुकानों में प्लास्टिक की बाेतल वाली शराब बिकनी भी शुरू हो चुकी है। पत्रिका ने इस पर डॉक्टरों व रसायन विशेषज्ञों से बातचीत की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।

डॉक्टरों व रसायन विशेषज्ञों का कहना है कि शराब को स्टोर करने का तरीका, उसके स्वाद ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य पर भी असर डाल सकता है। कांच रासायनिक रूप से निष्क्रिय होता है। इसका मतलब है कि यह शराब के साथ किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं करता। इससे न तो शराब का स्वाद बदलता है और न ही उसमें कोई हानिकारक तत्व मिलते हैं। इसी वजह से महंगी और प्रीमियम शराब अधिकतर कांच की बोतलों में ही बेची जाती है।

प्लास्टिक की बोतल हल्की व सस्ती

प्लास्टिक की बोतलें हल्की व सस्ती होती हैं इसलिए कई सस्ते ब्रांड इन्हें इस्तेमाल करते हैं। हालांकि समस्या यह है कि शराब, खासकर अधिक अल्कोहल प्रतिशत वाली, प्लास्टिक से कुछ रसायनों को खींच सकती है। इनमें फ्थेलेट्स व बिसफेनॉल ए (बीपीए) जैसे तत्व शामिल हो सकते हैं। ये लंबे समय में हार्मोनल असंतुलन जैसी समस्याएं पैदा कर सकते हैं। अगर प्लास्टिक बोतल को धूप या गर्मी में रखा जाए, तो रसायनों के निकलने की प्रक्रिया और तेज हो जाती है। इससे स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना बढ़ जाती है।

छत्तीसगढ़ सीनियर फोरेंसिक एक्सपर्ट व रिटायर्ड डीएमई डॉ. आरके सिंह ने कहा कोई भी कंज्यूमेबल चीज, जिसे लंबे समय तक स्टाेरेज रखा जाता है, उसे प्लास्टिक की बोतल में रखना स्वास्थ्य के लिहाज से हानिकारक है। अल्कोहल प्लास्टिक के साथ रिएक्शन कर सकता है। अल्कोहल प्लास्टिक से फ्थेलेट्स व बिसफेनॉल ए जैसे रसायन खींच सकता है, जो आने वाले दिनों में शरीर में हार्मोनल असंतुलन कर सकता है।

एनआईटी रायपुर के केमेस्ट्री एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. कफील अहमद ने कहा यदि प्लास्टिक बोतल की गुणवत्ता अच्छी नहीं हो तो उसमें रखी शराब स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। माइक्रो और नैनो प्लास्टिक जब एथिल अल्कोहल के संपर्क में आते हैं तो रासायनिक प्रतिक्रिया की आशंका बढ़ जाती है। इसका असर तुरंत दिखाई नहीं देता लेकिन नियमित सेवन करने वालों में 4 से 6 वर्षों के भीतर स्वास्थ्य संबंधी दुष्प्रभाव सामने आ सकते हैं।